बेंगलुरु। सांप के काटने से साढ़े चार साल के बच्चे की मौत के मामले में हाई कोर्ट के आदेश के बाद चन्नापटना टाउन पुलिस ने एक सरकारी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि बच्चे को समय पर अस्पताल पहुंचाने के बावजूद उसे जरूरी इलाज नहीं मिला और ‘गोल्डन आवर’ यानी उपचार के शुरुआती महत्वपूर्ण समय में उचित इंजेक्शन नहीं दिया गया।
मामले में बच्चे के पिता ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पिता ने याचिका दाखिल कर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच करने के निर्देश देने की मांग की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
जानकारी के अनुसार, बच्चे की मौत अप्रैल महीने में हुई थी। परिवार का आरोप है कि सांप के काटने के बाद बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इलाज में लापरवाही बरती गई। परिजनों का कहना है कि शुरुआती समय में सही उपचार मिलने से बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
याचिका में बच्चे के पिता ने आरोप लगाया कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भी आवश्यक एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराया। इसके कारण बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस को शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद चन्नापटना टाउन पुलिस ने संबंधित सरकारी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। इसमें अस्पताल के रिकॉर्ड, बच्चे के इलाज से जुड़े दस्तावेज, डॉक्टरों की भूमिका और उपचार में हुई प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।
बताया जा रहा है कि घटना के बाद संबंधित डॉक्टर को निलंबित भी कर दिया गया था। हालांकि, अब एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की कानूनी जांच आगे बढ़ेगी।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सांप के काटने के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध होने और सही उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसी कारण ऐसे मामलों में इलाज में किसी भी तरह की देरी गंभीर परिणाम दे सकती है।
परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल न्याय पाना है, ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे या मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय पर उचित उपचार मिलता तो बच्चे की जान बच सकती थी।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों को समय पर इलाज मिलने के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के मामलों में जिम्मेदारी तय करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। ऐसे मामलों में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि डॉक्टर की ओर से किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।
फिलहाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर है।