कर्नाटक में ग्रामीण छात्रों को बड़ी सौगात, मेडिकल-इंजीनियरिंग में 7.5% आरक्षण
बेंगलुरु। कर्नाटक के 71वें कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शिक्षा, रोजगार, कृषि, खेल और कन्नड़ भाषा के संरक्षण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। रविवार, 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु के कांतिरवा स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में ध्वजारोहण करने के बाद उन्होंने प्रदेश के विकास और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए मेडिकल, इंजीनियरिंग सहित उच्च व्यावसायिक शिक्षा की सरकारी सीटों में 7.5 प्रतिशत विशेष आरक्षण को प्रमुखता से सामने रखा गया। इस फैसले से ग्रामीण सरकारी संस्थानों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों और सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी (PU) कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। इसका लाभ चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले पात्र विद्यार्थियों को मिलेगा।
ग्रामीण सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को 7.5% आरक्षण
कर्नाटक सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उच्च व्यावसायिक शिक्षा में आगे बढ़ाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की है। इसके तहत पात्र विद्यार्थियों के लिए सरकारी सीटों में 7.5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण निर्धारित किया गया है।
इस प्रावधान के अंतर्गत कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों में पहली से दसवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और संबंधित सरकारी PU कॉलेजों में अध्ययन करने वाले पात्र अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 7.5 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 15 प्रतिशत ग्रामीण आरक्षण के भीतर एक विशेष उप-कोटा है। इसे कुल आरक्षण के ऊपर अतिरिक्त 7.5 प्रतिशत समझना सही नहीं होगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में संशोधित नियमों की अंतिम अधिसूचना 8 अक्टूबर 2026 को जारी कर दी थी। राज्योत्सव समारोह में मुख्यमंत्री ने इसी व्यवस्था को प्रमुखता से रेखांकित किया।
कक्षा 6 से 12 तक मिलेगी AI की शिक्षा
मुख्यमंत्री ने स्कूली शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की योजना का भी उल्लेख किया। इसके तहत सरकारी स्कूलों में छठी से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रशिक्षण देने की तैयारी है।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करना है। आज शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग, बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी सहित लगभग सभी क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूली स्तर से ही विद्यार्थियों को इस तकनीक की बुनियादी जानकारी देने से उनके कौशल विकास में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा राज्य में स्कूल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 15 हजार शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात भी कही गई। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
72 हजार सरकारी पदों पर भर्ती की तैयारी
युवाओं के रोजगार को लेकर भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े लगभग 72 हजार पदों को भरने के लिए आदेश जारी किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इन पदों पर भर्ती से युवाओं को सरकारी नौकरी के अवसर मिलेंगे और विभागों में कर्मचारियों की कमी दूर करने में सहायता मिलेगी।
इसके अलावा निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने 'युवा रोजगार सेतु' मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से नौकरी तलाशने वाले युवाओं को कंपनियों और रोजगार के अवसरों से जोड़ने की योजना बनाई है।
राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए लगभग 29,679 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने का भी उल्लेख किया गया। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब 66 हजार रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है।
कन्नड़ ध्वज को आधिकारिक पहचान देने पर विचार
कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान और कन्नड़ भाषा के सम्मान को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कन्नड़ केवल सरकारी कामकाज की भाषा बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रत्येक व्यक्ति के जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनना चाहिए।
उन्होंने पारंपरिक पीले और लाल रंग के कन्नड़ ध्वज को आधिकारिक राज्य ध्वज यानी 'नाडध्वज' के रूप में मान्यता देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मुद्दे पर आगामी बेलगावी विधानसभा सत्र में विस्तृत चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य कन्नड़ भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
किसानों के लिए नई योजनाओं की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी कई योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई और कृषि कार्यों के लिए रियायती बिजली उपलब्ध कराने पर सरकार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
इसके अलावा डिजिटल तकनीक के माध्यम से फसल सर्वेक्षण करने की योजना है। इसके तहत लगभग 1,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ड्रोन और उपग्रह आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 'वसुंधामृत', किसानों की आय बढ़ाने के लिए 'तेग सिरी' और गरीब किसानों की भूमि की जुताई में सहायता के लिए 'नेगिलयोगी' जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाने की बात कही गई।
इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि से होने वाली आय में सुधार करना है।
खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
खेल क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण और प्रशिक्षण सहायता का भी उल्लेख किया। राज्य सरकार की व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में 2 प्रतिशत तथा पुलिस और वन विभागों में 3 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान बताया गया।
इसके अलावा 'गोल लक्ष्य ओलंपिक' योजना के तहत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता देने की पहल भी सामने रखी गई।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 100 नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने और मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से 11 सरकारी अस्पतालों को अपनाने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी भी दी गई। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कर्नाटक के विकास के लिए 2047 का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने राज्य के भविष्य के विकास को लेकर 'कर्नाटक राज्य क्षेत्रीय शहरीकरण योजना-2047' का भी उल्लेख किया। इसके तहत अगले 20 वर्षों में लगभग पांच लाख करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचा निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
इसमें शहरी सुविधाओं, परिवहन, सड़क, नागरिक सेवाओं और आधारभूत संरचना के विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा।
कन्नड़ राज्योत्सव समारोह में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और युवाओं से अपनी मातृभाषा तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होना चाहिए, लेकिन अपनी भाषा और जड़ों से जुड़ाव भी बनाए रखना चाहिए।
कुल मिलाकर कर्नाटक के 71वें राज्योत्सव पर शिक्षा, रोजगार, कृषि, स्वास्थ्य, खेल और बुनियादी ढांचे से जुड़ी घोषणाओं के जरिए सरकार ने विकास की अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं। इनमें ग्रामीण सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए 7.5 प्रतिशत विशेष आरक्षण उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है।