बेंगलुरु। कर्नाटक में रविवार, 1 नवंबर को कन्नड़ राज्योत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राज्य के आवास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बी.जेड. जमीर अहमद खान ने बेल्लारी में ध्वजारोहण को अपने लंबे समय से देखे जा रहे सपने के पूरा होने जैसा बताया। वहीं, राज्य में कन्नड़ राज्योत्सव के कार्यक्रमों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के दिल्ली दौरे को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। जमीर अहमद खान ने स्पष्ट किया कि सिद्धारमैया दिल्ली में किसी स्टिंग ऑपरेशन की शिकायत दर्ज कराने नहीं जा रहे हैं, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व के बुलावे पर INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सिद्धारमैया को दिल्ली आने के लिए बुलाया है।

मंत्री जमीर अहमद खान ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कन्नड़ राज्योत्सव और सिद्धारमैया के दिल्ली दौरे से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बेल्लारी में राज्योत्सव के अवसर पर ध्वजारोहण करना उनके लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता है। उन्होंने इसे अपना सपना पूरा होने जैसा बताया। बेल्लारी में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में उनकी भागीदारी को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा गया।

बेल्लारी में ध्वजारोहण करना था सपना

जमीर अहमद खान ने कहा कि बेल्लारी में कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर ध्वजारोहण करना उनके लिए गर्व का विषय है। राज्योत्सव कर्नाटक की भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान का सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन है। इस दिन राज्यभर में सरकारी कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और ध्वजारोहण समारोह आयोजित किए जाते हैं।

राज्य सरकार ने इस वर्ष जिला मुख्यालयों पर ध्वजारोहण के लिए प्रभारी मंत्रियों की जिम्मेदारियां भी तय की थीं। 27 अक्टूबर को जारी सरकारी कार्यक्रम के अनुसार, बेल्लारी जिले में ध्वजारोहण की जिम्मेदारी मंत्री बी.जेड. जमीर अहमद खान को दी गई थी।

मंत्री ने कहा कि राज्योत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि कन्नड़ भाषा, साहित्य, संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है।

सिद्धारमैया के दिल्ली दौरे को लेकर दी सफाई

पत्रकारों ने जब पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के दिल्ली जाने और कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को लेकर सवाल किया, तो जमीर अहमद खान ने कहा कि उनका दिल्ली दौरा इस मामले में शिकायत दर्ज कराने के लिए नहीं है। वह कांग्रेस नेतृत्व के बुलावे पर दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे हैं।

मंत्री के अनुसार, AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सिद्धारमैया को दिल्ली आने के लिए बुलाया है। इसलिए उनके दौरे को स्टिंग ऑपरेशन मामले से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

दरअसल, सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग वीडियो को लेकर कर्नाटक की राजनीति में पहले से विवाद चल रहा है। सिद्धारमैया ने इस वीडियो को फर्जी और मनगढ़ंत बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग भी की है। इस मामले में पुलिस की जांच जारी है और वीडियो प्रसारित करने से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है।

दिल्ली में INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में होंगे शामिल

सिद्धारमैया का दिल्ली दौरा एक नवंबर को आयोजित INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। इस प्रदर्शन में विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों को उठा रहे हैं।

कांग्रेस नेतृत्व की ओर से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहा गया है। जमीर अहमद खान ने भी स्पष्ट किया कि सिद्धारमैया इसी राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए दिल्ली जा रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस दौरे को लेकर संगठनात्मक स्तर पर भी चर्चा हुई है। सिद्धारमैया ने पहले ही कहा था कि उन्होंने कथित स्टिंग ऑपरेशन का मुद्दा पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाया है और दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात का अवसर मिलने पर बातचीत करना चाहेंगे। हालांकि, उन्होंने किसी निश्चित मुलाकात का समय तय होने की बात नहीं कही थी।

मुख्यमंत्री और मंत्री राज्योत्सव समारोह में रहेंगे व्यस्त

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्री एक नवंबर को दिल्ली के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे। इसकी वजह कन्नड़ राज्योत्सव के कार्यक्रमों को बताया गया था।

शिवकुमार के अनुसार, राज्य सरकार ने सभी जिला प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में पहुंचकर ध्वजारोहण करने और राज्योत्सव समारोह में हिस्सा लेने के निर्देश दिए थे। विधायकों को भी अपने विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए कहा गया था।

उन्होंने कहा था कि कन्नड़ राज्योत्सव कर्नाटक के लिए विशेष महत्व रखता है और इसे पूरे राज्य में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसलिए मुख्यमंत्री और मंत्रियों का राज्य में रहना आवश्यक है।

क्या है कन्नड़ राज्योत्सव का महत्व?

कन्नड़ राज्योत्सव प्रत्येक वर्ष एक नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान कर्नाटक का गठन तत्कालीन मैसूर राज्य के रूप में हुआ था। वर्ष 1973 में इसका नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया।

इस दिन राज्य के सभी जिलों में सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में ध्वजारोहण के साथ कन्नड़ भाषा और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम होते हैं।

कर्नाटक की समृद्ध साहित्यिक परंपरा, लोक कला, संगीत, नृत्य और ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में कन्नड़ भाषा के सम्मान और उसके प्रचार-प्रसार को लेकर भी कार्यक्रम होते हैं।

स्टिंग ऑपरेशन विवाद पर भी टिकी राजनीतिक नजरें

सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन का मामला कांग्रेस के भीतर और राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले को लेकर अलग-अलग नेताओं की ओर से आरोप और सफाई सामने आती रही हैं।

सिद्धारमैया ने वीडियो को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की है। वहीं, इस मामले में अलग-अलग राजनीतिक नेताओं की ओर से भी बयान दिए गए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में वीडियो में दर्शाए गए कथित घटनाक्रम की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, वीडियो के निर्माण और प्रसार से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है।

जमीर अहमद खान ने अब स्पष्ट किया है कि सिद्धारमैया का दिल्ली दौरा शिकायत दर्ज कराने के उद्देश्य से नहीं है। उनका कहना है कि वह कांग्रेस नेतृत्व के बुलावे पर विपक्षी प्रदर्शन में हिस्सा लेने जा रहे हैं।

कुल मिलाकर कर्नाटक में एक ओर कन्नड़ राज्योत्सव के आयोजन को लेकर उत्साह है, तो दूसरी ओर सिद्धारमैया के दिल्ली दौरे ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। बेल्लारी में ध्वजारोहण को अपना सपना पूरा होना बताने वाले जमीर अहमद खान ने राज्योत्सव और कांग्रेस के राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की है।

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