बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने राज्य के कम बारिश और सूखे से प्रभावित इलाकों में बारिश बढ़ाने के उद्देश्य से 28 करोड़ रुपये की लागत से 60 दिनों तक क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन चलाने को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इस अभियान का संचालन कावेरी इरिगेशन कॉरपोरेशन की निगरानी में किया जाएगा, जबकि कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (KSNDMC) अभियान के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।

राज्य में इस वर्ष कम बारिश को देखते हुए क्लाउड सीडिंग की मांग लगातार उठ रही थी। जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ हुई बैठकों में भी कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कृत्रिम रूप से बारिश बढ़ाने के लिए क्लाउड सीडिंग शुरू करने का आग्रह किया था। इसके बाद सरकार ने इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

सरकारी आदेश के मुताबिक, इन मांगों के आधार पर मैसर्स कैथी क्लाइमेट मॉडिफिकेशन कंसल्टेंट्स LLP (KCMC) ने 13 अगस्त को राज्य सरकार के सामने क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन को लेकर प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। प्रस्ताव का अध्ययन संबंधित विभागों और वैज्ञानिक संस्थाओं के स्तर पर किए जाने के बाद अब सरकार ने अभियान को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

इस परियोजना के लिए KSNDMC ने ‘कर्नाटक इमरजेंसी क्लाउड सीडिंग प्रोग्राम-2026’ तैयार किया है। यह कार्यक्रम राज्य में पहले लागू की जा चुकी ‘वर्षाधारे’ क्लाउड सीडिंग योजना और केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) द्वारा संचालित CAIPEEX (क्लाउड एरोसोल इंटरैक्शन एंड प्रेसिपिटेशन एन्हांसमेंट एक्सपेरिमेंट) के अनुभवों और परिणामों पर आधारित बताया गया है।

क्लाउड सीडिंग एक ऐसी मौसम संशोधन तकनीक है, जिसमें उपयुक्त बादलों में कुछ विशेष पदार्थों के कणों को छोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य बादलों में मौजूद नमी और संघनन की प्रक्रिया को प्रभावित कर वर्षा की संभावना बढ़ाना होता है। हालांकि, इसके लिए पहले से मौजूद उपयुक्त बादलों की जरूरत होती है। केवल क्लाउड सीडिंग के जरिए साफ आसमान में बारिश पैदा नहीं की जा सकती।

कर्नाटक सरकार द्वारा शुरू किए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य कम बारिश वाले क्षेत्रों में उपलब्ध बादलों से अधिक वर्षा प्राप्त करने की संभावना तलाशना है। इसके लिए मौसम संबंधी आंकड़ों और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर अभियान संचालित किया जाएगा। KSNDMC इस प्रक्रिया में मौसम और बादलों की स्थिति से संबंधित तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराएगा।

राज्य में बारिश की कमी का सीधा असर कृषि, पेयजल और जलाशयों पर पड़ सकता है। कर्नाटक के कई हिस्सों में कृषि गतिविधियां मानसून पर काफी निर्भर हैं। यदि बारिश सामान्य से कम होती है, तो किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ती है। जलाशयों में पानी की कम आवक का असर पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने क्लाउड सीडिंग को एक आपातकालीन उपाय के रूप में आगे बढ़ाया है। 60 दिनों तक चलने वाले अभियान के दौरान वैज्ञानिक संस्थाओं और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। ऑपरेशन के दौरान मौसम की स्थिति, बादलों की उपलब्धता और वर्षा से जुड़े आंकड़ों की लगातार निगरानी की जाएगी।

कावेरी इरिगेशन कॉरपोरेशन को इस अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, KSNDMC वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। इससे मौसम विज्ञान से जुड़े आंकड़ों के आधार पर क्लाउड सीडिंग के लिए उपयुक्त परिस्थितियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

सरकार द्वारा मंजूर 28 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल अभियान से जुड़े विभिन्न कार्यों में किया जाएगा। इसमें तकनीकी सेवाएं, मौसम संबंधी निगरानी, विशेषज्ञ सहायता और क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। अभियान की वास्तविक लागत और संसाधनों का उपयोग संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

‘कर्नाटक इमरजेंसी क्लाउड सीडिंग प्रोग्राम-2026’ को तैयार करते समय पहले के अनुभवों को भी ध्यान में रखा गया है। ‘वर्षाधारे’ योजना के दौरान राज्य में क्लाउड सीडिंग के माध्यम से बारिश बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया गया था। इसके अलावा IITM के CAIPEEX कार्यक्रम से प्राप्त वैज्ञानिक अनुभवों को भी नई योजना का आधार बनाया गया है।

हालांकि, क्लाउड सीडिंग की सफलता पूरी तरह मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसके लिए पर्याप्त नमी वाले उपयुक्त बादलों का होना आवश्यक है। यदि बादल पर्याप्त विकसित नहीं हैं या वातावरण में जरूरी परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं, तो क्लाउड सीडिंग से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते। इसलिए अभियान में वैज्ञानिक निगरानी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

सरकार की इस पहल को लेकर अब यह देखना अहम होगा कि 60 दिनों के दौरान कितनी बारिश में वृद्धि दर्ज होती है और इसका सूखा प्रभावित क्षेत्रों पर कितना प्रभाव पड़ता है। अभियान के दौरान प्राप्त आंकड़े भविष्य में राज्य की मौसम प्रबंधन और जल संसाधन योजनाओं के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।

कर्नाटक में जल संकट और अनियमित मानसून की चुनौती को देखते हुए सरकार ने इस अभियान को तत्काल उपाय के रूप में मंजूरी दी है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड सीडिंग को बारिश की कमी का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना भी लंबे समय के लिए जरूरी होगा।

फिलहाल 28 करोड़ रुपये की इस परियोजना के जरिए राज्य सरकार कम बारिश वाले क्षेत्रों में वर्षा बढ़ाने की संभावना तलाश रही है। कावेरी इरिगेशन कॉरपोरेशन की निगरानी और KSNDMC की वैज्ञानिक मदद से यह 60 दिवसीय अभियान संचालित किया जाएगा। अब इसकी सफलता पर नजर रहेगी और अभियान के दौरान जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर इसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा।

Tags: