धनबाद। पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण मैथन और पंचेत डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। पिछले सप्ताह की तुलना में दोनों जलाशयों में करीब 10 फीट पानी बढ़ने की बात सामने आई है। हालात को देखते हुए दामोदर घाटी निगम यानी डीवीसी ने अलर्ट जारी कर संबंधित स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने को कहा है। दोनों डैम का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 10 फीट नीचे रह जाने के कारण निचले और तटवर्ती इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

लगातार बारिश के कारण मैथन और पंचेत जलाशयों में बड़ी मात्रा में पानी पहुंच रहा है। कैचमेंट क्षेत्र में बारिश जारी रहने से दोनों डैम के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले सप्ताह तक स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य थी, लेकिन तीन दिनों की भारी बारिश ने तस्वीर बदल दी है। करीब 10 फीट तक जलस्तर बढ़ने से डीवीसी और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

जलाशयों में लगातार पानी आने के कारण डैम से पानी की निकासी भी की जा रही है। डैम की सुरक्षा और जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। इसके कारण निचले इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। खासकर पश्चिम बंगाल के तटवर्ती और निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की बात सामने आ रही है।

पानी छोड़े जाने का असर पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना और वर्धमान समेत आसपास के क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। निचले इलाकों में पानी पहुंचने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खेतों और रिहायशी क्षेत्रों में पानी घुसने का खतरा बना हुआ है। लगातार बारिश जारी रहने और डैम से पानी की निकासी बढ़ने की स्थिति में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

डीवीसी ने परिस्थितियों को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। संबंधित जिलों और स्थानीय प्रशासन को डैम से छोड़े जा रहे पानी तथा जलस्तर में हो रहे बदलाव की जानकारी दी जा रही है, ताकि जरूरत के अनुसार समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। नदियों के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।

मैथन और पंचेत डैम दामोदर घाटी की जल प्रबंधन व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानसून के दौरान इन जलाशयों में आने वाले पानी को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती होती है। अधिक बारिश होने पर जलाशयों का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में डैम की सुरक्षा के लिए चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ना आवश्यक हो जाता है। हालांकि इसका सीधा असर डैम के निचले हिस्से में बसे इलाकों पर पड़ सकता है।

पिछले तीन दिनों की बारिश ने इसी चुनौती को एक बार फिर सामने ला दिया है। जलग्रहण क्षेत्र से बड़ी मात्रा में पानी आने के कारण जलाशयों की क्षमता पर दबाव बढ़ा है। दोनों डैम खतरे के निशान से करीब 10 फीट नीचे रह गए हैं। यदि कैचमेंट क्षेत्र में इसी तरह भारी बारिश जारी रहती है तो जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

डीवीसी के लिए एक तरफ डैम के भीतर सुरक्षित जलस्तर बनाए रखना जरूरी है तो दूसरी तरफ पानी छोड़ते समय निचले इलाकों की स्थिति का भी ध्यान रखना पड़ता है। यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन को पहले से सतर्क किया गया है। पानी छोड़ने की मात्रा और नदियों के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पश्चिम बंगाल के प्रभावित इलाकों में प्रशासन के सामने संभावित बाढ़ से निपटने की चुनौती बढ़ गई है। तटवर्ती क्षेत्रों में नदी का जलस्तर बढ़ने से खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों में पानी पहुंच सकता है। कई निचले इलाके पहले ही बारिश के पानी से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में डैम से अतिरिक्त पानी आने पर स्थिति और मुश्किल हो सकती है।

कृषि क्षेत्र के लिए भी बढ़ता जलस्तर चिंता का कारण है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा होने से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीण इलाकों में संपर्क मार्ग जलमग्न होने से आवागमन भी प्रभावित हो सकता है। प्रशासन की प्राथमिकता ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां समय रहते आवश्यक व्यवस्था करना है।

मैथन और पंचेत डैम के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बारिश की मात्रा और जलाशयों में पानी के प्रवाह के आधार पर आगे पानी छोड़ने का फैसला लिया जा सकता है। इसलिए डैम के निचले हिस्से में रहने वाले लोगों के लिए प्रशासनिक सूचनाओं और चेतावनियों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल सबसे ज्यादा चिंता लगातार हो रही बारिश को लेकर है। यदि बारिश की रफ्तार कम होती है तो जलाशयों में पानी आने की मात्रा धीरे-धीरे घट सकती है। इसके विपरीत भारी बारिश का दौर जारी रहने पर डैम का जलस्तर और बढ़ सकता है और पानी की निकासी बढ़ानी पड़ सकती है।

मैथन और पंचेत डैम में एक सप्ताह के भीतर करीब 10 फीट जलस्तर बढ़ने के बाद स्थिति पर डीवीसी की नजर बनी हुई है। दोनों जलाशय खतरे के निशान से लगभग 10 फीट नीचे बताए जा रहे हैं। वहीं डैम से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण पश्चिम बंगाल के कई तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति पैदा होने के बीच प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है।

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