बोकारो/नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्र के भीतर बचाव और गोताखोरी संबंधी क्षमताओं को मजबूत करने वाले आईएनएस निस्तार के निर्माण में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी सेल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कंपनी के अनुसार, इस विशेष पोत के लिए आवश्यक विशेष ग्रेड की स्टील प्लेटों की पूरी मात्रा उसने उपलब्ध कराई थी। बोकारो स्टील प्लांट की भागीदारी से संबंधित रिपोर्ट भी सामने आई है। हालांकि, यह नई आपूर्ति की घोषणा नहीं है; सेल ने इस योगदान की जानकारी अगस्त 2025 में दी थी। 

आईएनएस निस्तार भारत में डिजाइन और निर्मित पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल है। इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया और 18 जुलाई 2025 को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल किया गया। रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ की उपस्थिति में हुए समारोह के साथ यह पोत औपचारिक रूप से नौसैनिक सेवा का हिस्सा बना। इसका प्रमुख उद्देश्य गहरे समुद्र में जटिल गोताखोरी तथा बचाव अभियानों को सहायता देना है। इसलिए इसकी भूमिका को केवल सामान्य गश्ती जहाज के रूप में समझना पर्याप्त नहीं होगा। 
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, निस्तार लगभग 118 मीटर लंबा पोत है और इसका विस्थापन 10 हजार टन से अधिक है। यह आधुनिक गोताखोरी उपकरणों से सुसज्जित है। इसके निर्माण में 120 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की भागीदारी रही तथा इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री शामिल है। मंत्रालय ने इसे देश की जटिल जहाज बनाने की क्षमता का उदाहरण बताया है। स्वदेशी निर्माण में बड़े शिपयार्ड के साथ सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराने वाले उद्योगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। निस्तार की विशेष क्षमता 300 मीटर तक की गहराई में डीप सी सैचुरेशन डाइविंग संबंधी अभियान संचालित करने की है। इसके अलावा इसमें 75 मीटर तक गोताखोरी के लिए साइड डाइविंग स्टेज की व्यवस्था है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ऐसे जटिल अभियानों की क्षमता दुनिया की चुनिंदा नौसेनाओं के पास है। पोत को भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग के वर्गीकरण नियमों के अनुरूप डिजाइन और निर्मित किया गया है। ये विशेषताएं इसे सामान्य नौसैनिक पोतों से अलग पहचान देती हैं। 
यह पोत डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल यानी डीएसआरवी के लिए ‘मदर शिप’ की भूमिका भी निभाएगा। समुद्र के भीतर किसी पनडुब्बी में आपात स्थिति आने पर कर्मियों को बचाने और बाहर निकालने के अभियान में यह व्यवस्था उपयोगी होती है। निस्तार के नाम का अर्थ भी बचाव, मुक्ति अथवा उद्धार से जुड़ा है। इसकी विशेष पहचान नौसेना की संकट प्रतिक्रिया और पानी के नीचे सहायता देने वाली क्षमताओं से संबंधित है। 
सेल ने अपनी आधिकारिक विज्ञप्ति में निस्तार के लिए विशेष ग्रेड की प्लेटों की पूरी आपूर्ति की पुष्टि की थी। उसी विज्ञप्ति में आईएनएस अजय के लिए विशेष डीएमआर ग्रेड की प्लेटें देने का भी उल्लेख है। दोनों पोतों की भूमिकाएं अलग हैं। अजय उथले पानी में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विकसित श्रृंखला का हिस्सा है, जबकि निस्तार गोताखोरी और बचाव सहायता पोत है। इसलिए एक पोत की तकनीकी विशेषताओं को दूसरे पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। 
बोकारो स्टील प्लांट के आधिकारिक उत्पाद विवरण में डीएमआर 249ए ग्रेड स्टील भी शामिल है। संयंत्र ने इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से जुड़े पनडुब्बी पुर्जों के निर्माण और आयात के विकल्प के रूप में सूचीबद्ध किया है। बोकारो का उत्पादन क्षेत्र हॉट रोल्ड कॉइल, प्लेट, शीट और अन्य फ्लैट स्टील उत्पादों तक फैला है। यह औद्योगिक आधार रक्षा क्षेत्र की विशिष्ट सामग्री आवश्यकताओं को पूरा करने में भी योगदान देता है। निस्तार के लिए आपूर्ति की गई प्लेटों का महत्व स्वदेशी रक्षा निर्माण की व्यापक प्रक्रिया में देखा जा सकता है। जहाज का निर्माण केवल अंतिम असेंबली तक सीमित नहीं होता; उसके लिए सामग्री, डिजाइन, उपकरण और परीक्षण की अलग-अलग क्षमताएं चाहिए। सेल अपने विशेष स्टील के योगदान को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से जोड़ती है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक विज्ञप्ति में निस्तार के लिए दी गई प्लेटों की मात्रा, मोटाई या कुल आपूर्ति मूल्य का अलग विवरण नहीं दिया गया है। 
नौसैनिक परियोजनाओं में सेल का योगदान निस्तार तक सीमित नहीं है। कंपनी ने जून 2026 की विज्ञप्ति में आईएनएस दूनागिरि, आईएनएस अग्रय और आईएनएस संशोधक के लिए कुल 5,700 टन विशेष स्टील देने की जानकारी दी। इसमें बोकारो, भिलाई और राउरकेला संयंत्रों से निर्मित डीएमआर 249ए ग्रेड की हॉट रोल्ड शीट और प्लेटें शामिल थीं। कंपनी ने स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत तथा अन्य नौसैनिक परियोजनाओं के लिए सामग्री उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया है। बढ़ती रक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सेल ने विशेष डीएमआर ग्रेड प्लेटों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उपाय किए हैं। कंपनी के मुताबिक, इसमें राउरकेला के स्पेशल प्लेट प्लांट पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह बताता है कि नौसेना की सामग्री जरूरतें पूरी करने में सेल के विभिन्न संयंत्र मिलकर काम करते हैं। निस्तार में इस्तेमाल हुआ विशेष स्टील इसी व्यापक औद्योगिक योगदान का हिस्सा है, जो स्वदेशी जहाज निर्माण और समुद्री बचाव क्षमता को आधार प्रदान करता है।
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