रांची : झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत तेजी से काम किया जा रहा है। राज्य के आठ जिलों में अब तक 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के गणना प्रपत्र न केवल भरकर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को सौंप दिए गए हैं, बल्कि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन दर्ज भी कर दिया गया है।
मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान में जिलों के प्रदर्शन में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। जहां कुछ जिलों ने तेजी से काम पूरा किया है, वहीं कुछ जिले अभी पीछे चल रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, सिमडेगा जिला इस अभियान में सबसे आगे है। यहां अब तक 65.2 प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्र डिजिटलाइज्ड किए जा चुके हैं। जिले में मतदाताओं से प्रपत्र लेने और उन्हें डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल करने का काम तेजी से किया जा रहा है।
सिमडेगा के अलावा कोडरमा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में भी SIR अभियान की प्रगति बेहतर रही है। इन दोनों जिलों में गणना प्रपत्रों के डिजिटलाइजेशन का काम 60 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि लगातार मॉनिटरिंग और मैदानी स्तर पर कर्मचारियों की सक्रियता के कारण इन जिलों में काम की रफ्तार अच्छी बनी हुई है।
विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं। इसके बाद इन प्रपत्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में गलतियों को सुधारना, नए मतदाताओं की जानकारी जोड़ना और पुराने रिकॉर्ड का सत्यापन करना है।
हालांकि, कुछ जिलों में काम की गति अपेक्षाकृत धीमी है। पूर्वी सिंहभूम और गोड्डा जिले इस अभियान में पिछड़ते नजर आ रहे हैं। इन दोनों जिलों में अब तक 30 प्रतिशत मतदाताओं के गणना प्रपत्र भी डिजिटलाइज्ड नहीं हो पाए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, धीमी प्रगति वाले जिलों में भी काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों और बीएलओ को लक्ष्य के अनुसार काम पूरा करने को कहा गया है, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
निर्वाचन विभाग लगातार जिलावार प्रगति की समीक्षा कर रहा है। जिन क्षेत्रों में काम धीमा है, वहां अतिरिक्त निगरानी और कर्मचारियों को सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इससे चुनाव से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट किया जाता है। इसमें मृत मतदाताओं के नाम हटाने, स्थान बदल चुके मतदाताओं की जानकारी सुधारने और पात्र नए मतदाताओं को शामिल करने का काम किया जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटलाइजेशन से मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सकेगा। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से भविष्य में मतदाता संबंधी जानकारी की जांच और सुधार प्रक्रिया भी आसान होगी।
बीएलओ की भूमिका इस अभियान में सबसे महत्वपूर्ण है। उन्हें घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करना, जरूरी जानकारी जुटाना और प्रपत्रों को सही तरीके से भरवाना होता है। इसके बाद यही जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज की जाती है।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मतदाताओं तक पहुंचना इस अभियान की बड़ी चुनौती है। इसके लिए निर्वाचन विभाग स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की मदद ले रहा है और लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
निर्वाचन अधिकारियों ने मतदाताओं से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं। इससे मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी को दूर करने में मदद मिलेगी।
फिलहाल झारखंड में SIR अभियान जारी है और आने वाले दिनों में डिजिटलाइजेशन की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। जहां सिमडेगा, कोडरमा और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं पूर्वी सिंहभूम और गोड्डा जैसे जिलों को तेजी लाने की जरूरत है।
निर्वाचन विभाग का लक्ष्य है कि समय पर पूरी प्रक्रिया पूरी कर राज्य की मतदाता सूची को अपडेट और अधिक विश्वसनीय बनाया जा सके।