रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का मंगलवार को चौथा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य विभिन्न मुद्दों को लेकर आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के विधायक अपनी-अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर आसन के सामने पहुंच गए। इस दौरान सदन में जोरदार नारेबाजी हुई और कुछ देर तक माहौल काफी गर्म रहा। लगातार बढ़ते हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया था कि चौथा दिन भी पूरी तरह शांतिपूर्ण रहने वाला नहीं है। प्रश्नकाल और अन्य निर्धारित कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने अपने-अपने मुद्दे उठाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते दोनों पक्षों के विधायक आसन के सामने पहुंच गए और नारेबाजी शुरू हो गई। सदन के भीतर काफी देर तक शोर-शराबे की स्थिति बनी रही।

विपक्षी सदस्यों की ओर से सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश की गई। वहीं, सत्ता पक्ष के सदस्य भी विपक्ष के विरोध का जवाब देते नजर आए। दोनों ओर से लगातार नारेबाजी होने के कारण सदन में सामान्य तरीके से कार्यवाही चलाना मुश्किल हो गया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।

सदन के आसन के सामने सदस्यों के पहुंचने से विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई। अध्यक्ष की ओर से बार-बार सदस्यों को शांत रहने और अपनी-अपनी सीटों पर जाने का आग्रह किया गया। इसके बावजूद जब स्थिति सामान्य नहीं हुई तो सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

मानसून सत्र के चौथे दिन सदन में हंगामे की शुरुआत को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विधानसभा का मानसून सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दे उठाए जाने की संभावना है। दूसरी ओर सरकार की कोशिश है कि सदन की कार्यवाही निर्धारित एजेंडे के अनुसार संचालित हो और महत्वपूर्ण विधायी एवं जनहित के विषयों पर चर्चा हो सके।

सत्र के पिछले दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली है। विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष लगातार सरकार की नीतियों और कामकाज से जुड़े सवाल उठा रहा है। वहीं, सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जा रहा है। ऐसे में मंगलवार को सदन की शुरुआत से ही दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिली।

विधानसभा के भीतर होने वाला हंगामा केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी होते हैं। विपक्ष अक्सर सदन के माध्यम से सरकार का ध्यान जनहित से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करने की कोशिश करता है। वहीं, सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह सदन में उठाए गए सवालों का जवाब दे और निर्धारित विधायी कार्यों को आगे बढ़ाए। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने पर कार्यवाही बाधित होती है।

मंगलवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद विधायक आसन के सामने पहुंच गए। दोनों ओर से नारेबाजी होने लगी। सदन में मौजूद अन्य सदस्यों के लिए भी इस शोर-शराबे के बीच कार्यवाही में हिस्सा लेना मुश्किल हो गया। अंततः अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

अब सभी की नजरें दोपहर 12 बजे के बाद होने वाली कार्यवाही पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सदन दोबारा शुरू होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपने स्थान पर लौटते हैं या फिर विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध जारी रहता है। यदि हंगामा जारी रहता है तो मानसून सत्र के महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।

मानसून सत्र के दौरान सरकार के सामने जहां विधायी कार्यों को समय पर पूरा करने की चुनौती है, वहीं विपक्ष सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरने की रणनीति के साथ सदन में मौजूद है। मंगलवार की घटना से संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में भी विधानसभा की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक तापमान बढ़ा रह सकता है।

फिलहाल, मंगलवार को सत्र के चौथे दिन की शुरुआत हंगामे के साथ हुई और सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। अब यह देखना होगा कि कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सदन में चर्चा और विधायी कामकाज आगे बढ़ पाता है या फिर नारेबाजी और विरोध का सिलसिला जारी रहता है।

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