
रांची : झारखंड की राजधानी रांची में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आवंटित फ्लैटों के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। रांची नगर निगम ने जांच के दौरान पाया कि योजना के तहत लाभ प्राप्त करने वाले कई लोगों ने अपने आवंटित आवास स्वयं रहने के बजाय किराये पर दे दिए हैं। इस खुलासे के बाद नगर निगम ने ऐसे 232 लाभार्थियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तृतीय घटक के अंतर्गत धुर्वा स्थित लाइट हाउस प्रोजेक्ट (एलएचपी) आवासीय परिसर में आवंटित फ्लैटों से संबंधित है।
नगर निगम के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोगों को स्थायी आवास उपलब्ध कराना है। योजना के तहत आवंटित घरों में लाभार्थी स्वयं निवास करेंगे, यह इसकी प्रमुख शर्तों में शामिल है। लेकिन जांच के दौरान यह सामने आया कि कई लाभार्थियों ने इन आवासों को किराये पर देकर योजना की मूल भावना का उल्लंघन किया है।
धुर्वा स्थित लाइट हाउस प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आधुनिक तकनीक से विकसित आवासीय परियोजना के रूप में तैयार किया गया था। इस परियोजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को बेहतर और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। नगर निगम ने समय-समय पर परियोजना का निरीक्षण किया, जिसके दौरान कुछ आवासों में वास्तविक लाभार्थियों के बजाय अन्य लोगों के रहने की जानकारी मिली।
इसके बाद निगम ने विस्तृत सत्यापन अभियान चलाया। अधिकारियों ने घर-घर जाकर निवासियों का भौतिक सत्यापन किया, दस्तावेजों की जांच की और पड़ोसियों से भी जानकारी जुटाई। जांच में यह पुष्टि होने के बाद कि कई फ्लैट किराये पर दिए गए हैं, संबंधित लाभार्थियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
नगर निगम ने ऐसे 232 लाभार्थियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे पूछा गया है कि योजना की शर्तों का उल्लंघन करते हुए आवंटित आवास को किराये पर क्यों दिया गया। लाभार्थियों को निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला या जांच में आरोप सही पाए गए तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसमें आवंटन रद्द करना, आवास वापस लेना या योजना के नियमों के अनुसार अन्य कानूनी कदम उठाना भी शामिल हो सकता है।
नगर निगम का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो वास्तव में आवासहीन हैं या जिनके पास रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यदि कोई लाभार्थी सरकारी सहायता से प्राप्त मकान को किराये पर देता है, तो इससे योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है और वास्तविक जरूरतमंद लोग लाभ से वंचित रह जाते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में भी इस प्रकार के मामलों को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और भौतिक सत्यापन जारी रहेगा। निगम यह सुनिश्चित करेगा कि सभी लाभार्थी योजना की शर्तों का पालन करें और आवंटित आवास का उपयोग केवल स्वयं के निवास के लिए करें।
शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों लोगों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। ऐसे में यदि लाभार्थी नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है और योजना की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि समय-समय पर सत्यापन अभियान चलाने से ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। साथ ही लाभार्थियों को योजना की शर्तों और जिम्मेदारियों के बारे में भी लगातार जागरूक किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन परिवारों को वास्तव में आवास की आवश्यकता थी, उन्हें योजना से लाभ मिला है। ऐसे में यदि कुछ लोग सरकारी मकानों को आय का साधन बनाकर किराये पर देते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी योजना का दुरुपयोग करने का प्रयास न करे।
नगर निगम ने संकेत दिए हैं कि केवल धुर्वा स्थित लाइट हाउस प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकसित अन्य परियोजनाओं का भी समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा। यदि कहीं भी नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलती है तो तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) केंद्र सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को किफायती आवास उपलब्ध कराना है। योजना के तहत लाभार्थियों को निर्धारित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है, जिनमें आवंटित मकान में स्वयं निवास करना भी शामिल है।
फिलहाल रांची नगर निगम द्वारा जारी किए गए 232 नोटिसों के बाद संबंधित लाभार्थियों के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। उनके जवाब और जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस कार्रवाई को सरकारी आवास योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





