नोटिस पर चुप्पी: रांची अवैध शराब मामले में सिर्फ उत्पाद दारोगा ने तोड़ी खामोशी।

Update: 2026-07-12 09:32 GMT

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के ओरमांझी स्थित बिहार राजद (RJD) के पूर्व एमएलसी सुबोध राय के बाटलिंग प्लांट 'तरंगिनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड' में मिले अवैध शराब के हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस गंभीर मामले की जांच कर रहे उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त द्वारा जारी किए गए कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस का जवाब देने की अंतिम समय-सीमा खत्म हो चुकी है, लेकिन प्रशासनिक महकमे और आरोपियों की तरफ से इस पर रहस्यमयी चुप्पी देखी जा रही है। ताज़ा अपडेट के अनुसार, विभाग द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के बावजूद अब तक केवल उत्पाद दारोगा सह बाउंड अधिकारी रूपेश कुमार ने ही अपना आधिकारिक जवाब दर्ज कराया है, जबकि प्लांट के मुख्य संचालक सुबोध राय और देश की प्रतिष्ठित शराब निर्माता कंपनी रेडिको खेतान लिमिटेड की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विभाग द्वारा शो-कॉज नोटिस का जवाब दाखिल करने के लिए 8 जुलाई तक का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया था। निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी प्लांट प्रबंधन और संबंधित कंपनी द्वारा जवाब न दिए जाने को उत्पाद विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। इस घोर लापरवाही और असहयोग के बाद अब विभाग तरंगिनी बाटलिंग प्लांट का आधिकारिक लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसके साथ ही, जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्लांट की सील खोलने की कानूनी प्रक्रिया भी विभाग द्वारा शुरू कर दी गई है ताकि भीतर मौजूद स्टॉक और दस्तावेजों की सघन जांच की जा सके और मामले की तह तक पहुँचा जा सके।

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब उत्पाद विभाग की टीम ने ओरमांझी स्थित इस बाटलिंग प्लांट पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान वहां से भारी मात्रा में अवैध शराब और नियमों के विरुद्ध तैयार की जा रही खेप बरामद हुई थी, जिसके बाद पूरे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया था। चूंकि यह प्लांट बिहार के पूर्व एमएलसी और कद्दावर नेता सुबोध राय से जुड़ा है, इसलिए इस मामले पर सरकार और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्लांट को सील कर दिया था और संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उत्पाद दारोगा रूपेश कुमार, जो कि इस प्लांट के बाउंड अधिकारी के रूप में तैनात थे, उन्होंने समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रख दिया है। उन्होंने अपने जवाब में क्या दलीलें दी हैं, इसकी समीक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। लेकिन मुख्य आरोपी सुबोध राय और रेडिको खेतान लिमिटेड की ओर से समय पर जवाब न आना यह दर्शाता है कि वे या तो जांच से बच रहे हैं या उनके पास विभाग के पुख्ता सबूतों का कोई जवाब नहीं है। कानून के जानकारों का मानना है कि कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने की स्थिति में उत्पाद विभाग को एकतरफा कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है, जिसके तहत सबसे पहले लाइसेंस निरस्तीकरण की गाज गिरना तय माना जा रहा है।

इस बड़े शराब कांड ने झारखंड में अवैध शराब के सिंडिकेट और उसमें सफेदपोशों की मिलीभगत को एक बार फिर उजागर कर दिया है। उत्पाद विभाग अब इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रहा है कि इस प्लांट से उत्पादित होने वाली अवैध शराब की सप्लाई कहाँ-कहाँ की जा रही थी और इसमें कौन-कौन से बड़े अधिकारी या नेता शामिल हैं। लाइसेंस रद्द करने और सील खोलने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आने वाले दिनों में सुबोध राय और रेडिको खेतान कंपनी के खिलाफ कानूनी शिकंजा और अधिक कसने की पूरी संभावना है। राजधानी रांची का उत्पाद विभाग इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिख रहा है।

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