भुइयांडीह में बुलडोजर कार्रवाई का विरोध

Update: 2026-07-30 04:02 GMT

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा भुइयांडीह क्षेत्र में संभावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की चर्चाओं के बीच बुधवार को इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती के लोगों ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बुजुर्ग शामिल हुए। बस्तीवासियों ने प्रशासन से कार्रवाई पर रोक लगाने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मकान तोड़े गए तो सैकड़ों लोग बेघर हो जाएंगे।

प्रदर्शन कर रहे लोगों के अनुसार, भुइयांडीह की इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती में कुल 145 मकानों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की आशंका है। बस्तीवासियों का दावा है कि वर्ष 2023 में हुए सर्वे के दौरान उनके मकानों को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए नोटिस जारी किया गया था। अब उन्हें जानकारी मिली है कि 6 अगस्त को प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से अब तक इस तिथि को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

बस्तीवासियों का कहना है कि वे कई वर्षों से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं और अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उनका आरोप है कि यदि प्रशासन बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए अतिक्रमण हटाता है, तो उनके सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सरकार और प्रशासन को पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराना चाहिए।

उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे किसी भी प्रकार के टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अपने घरों को बचाने और परिवारों के भविष्य की सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले पर पुनर्विचार करने और प्रभावित परिवारों के साथ बातचीत करने की मांग की।

इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता से हस्तक्षेप की मांग की गई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार या प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करना चाहता है, तो सबसे पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। उनका कहना था कि जिन लोगों के घर हटाए जाने हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या किसी अन्य सरकारी आवास योजना के तहत पहले वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए।

बन्ना गुप्ता ने कहा कि गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बिना पुनर्वास के बेघर करना उचित नहीं होगा। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे इस मुद्दे को सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी उठाएंगे।

मानगो की मेयर सुधा गुप्ता से भी बस्तीवासियों ने हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जनप्रतिनिधियों को इस मामले में आगे आकर लोगों की समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास करना चाहिए। उनका कहना है कि वर्षों से रह रहे परिवारों के सामने अचानक बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और दैनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

बस्तीवासियों ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर कई बार प्रशासन से संपर्क करने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि प्रशासन उनके पक्ष को भी सुने और किसी भी कार्रवाई से पहले सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करे। लोगों का कहना है कि यदि उनके मकान हटाए जाते हैं, तो उनके पास रहने के लिए कोई अन्य स्थान नहीं है।

हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से अब तक संभावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। न ही 6 अगस्त को कार्रवाई किए जाने की पुष्टि की गई है। प्रशासन की ओर से पूर्व में जारी नोटिस और भूमि से संबंधित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भूमि संबंधी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है और सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।

शहरी क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अक्सर संवेदनशील मुद्दा बन जाती है, क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में ऐसे परिवार प्रभावित होते हैं जो वर्षों से संबंधित स्थानों पर रह रहे होते हैं। ऐसे मामलों में अदालतों और सरकारों ने भी कई बार पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोगों के अधिकारों, सामाजिक परिस्थितियों और वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

फिलहाल भुइयांडीह की इंद्रानगर और कल्याणनगर बस्ती के लोग प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाता है, तो यह मामला प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संवाद तथा पुनर्वास की व्यवस्था पर काफी हद तक निर्भर करेगा। बस्तीवासियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग केवल इतनी है कि यदि कार्रवाई आवश्यक हो, तो पहले उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी परिवार को खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।

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