गोड्डा। एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में जारी राजनीतिक बहस के बीच गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रही है।
रविवार को परिसदन में मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद ने कहा कि देश के कई राज्यों में कोयला उत्पादन हो रहा है, लेकिन झारखंड में इसका विरोध अलग कारणों से किया जा रहा है।
एमएमडीआर संशोधन विधेयक पर उठाए सवाल
निशिकांत दुबे ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 को लेकर राज्य सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक रूप दे रही है और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं बता रही है।
उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े कानून और नीतियां पूरे देश के लिए बनाई जाती हैं और इनके पालन में राज्यों की भी भूमिका होती है।
कोयला उत्पादन को लेकर दिया बयान
सांसद ने कहा कि देश के कई राज्यों में कोयले का उत्पादन हो रहा है और इससे ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि यदि झारखंड सरकार को कोयला उत्पादन से आपत्ति है तो वह अपना कोयला उत्पादन बंद कर सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को झारखंड के कोयले की जरूरत नहीं है और देश के अन्य राज्यों से भी कोयले की आपूर्ति की जा सकती है।
सरकार की नीतियों पर साधा निशाना
निशिकांत दुबे ने हेमंत सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि खनिज संपदा वाले राज्य में विकास और रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को उठा रही है।
मीडिया से बातचीत में रखी अपनी बात
सांसद ने रविवार को परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि खनन और खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और स्पष्ट नीति जरूरी है।
उन्होंने राज्य सरकार से इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
झारखंड में कोयला मुद्दा बना राजनीतिक बहस
झारखंड देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां कोयला खनन और उससे जुड़े मुद्दे समय-समय पर राजनीतिक बहस का विषय बनते रहे हैं।
एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 को लेकर भी राज्य में पक्ष और विपक्ष की अलग-अलग राय सामने आ रही है।
विकास और पर्यावरण को लेकर चर्चा
खनन से जुड़े मुद्दों पर एक ओर जहां ऊर्जा जरूरतों और रोजगार की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण और स्थानीय लोगों के हितों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
ऐसे में खनिज नीति को लेकर सरकारों और राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आते रहते हैं।
आगे भी जारी रह सकती है राजनीतिक बयानबाजी
निशिकांत दुबे के बयान के बाद झारखंड में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
एमएमडीआर संशोधन विधेयक को लेकर आने वाले दिनों में राज्य सरकार और विपक्ष के बीच बहस और तेज हो सकती है।