झारखंड हाईकोर्ट को मिले तीन नए न्यायाधीश, केंद्र ने जारी की नियुक्ति की अधिसूचना
रांची। झारखंड हाईकोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिले हैं। झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस कैडर के तीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार ने इन नियुक्तियों से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। नई नियुक्तियों के बाद झारखंड हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 13 से बढ़कर 16 हो जाएगी।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले न्यायिक अधिकारियों में गढ़वा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद, साहिबगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिल कुमार और डालटनगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम शर्मा शामिल हैं।
तीनों न्यायिक अधिकारी लंबे समय से राज्य की न्यायिक सेवा से जुड़े रहे हैं। अब वे जिला न्यायपालिका से पदोन्नत होकर झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।
केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना
तीनों न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद आगे बढ़ी थी। कॉलेजियम ने मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा के नामों की सिफारिश झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद के लिए की थी।
निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र सरकार ने तीनों की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी। अब शपथ ग्रहण के बाद तीनों न्यायाधीश हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य शुरू कर सकेंगे।
नई नियुक्तियों से हाईकोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई और न्यायिक कार्यों के संचालन में अतिरिक्त पीठ उपलब्ध होने की उम्मीद है।
मनोज प्रसाद गढ़वा में थे पीडीजे
मनोज प्रसाद वर्तमान में गढ़वा में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जिला न्यायपालिका में कार्य करने के दौरान उन्हें विभिन्न प्रकार के दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई का अनुभव मिला है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा में उनका नाम शामिल होने के बाद से उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी। केंद्र की अधिसूचना जारी होने के साथ अब उन्हें झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त कर दिया गया है।
अखिल कुमार भी बने हाईकोर्ट के जज
साहिबगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अखिल कुमार को भी झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वह झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस कैडर से आते हैं।
जिला न्यायपालिका में लंबे अनुभव के बाद अब उन्हें हाईकोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलेगा। अखिल कुमार का नाम भी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से केंद्र सरकार को भेजी गई सिफारिश में शामिल था।
नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद अब शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
राम शर्मा को भी मिली जिम्मेदारी
डालटनगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राम शर्मा भी झारखंड हाईकोर्ट के नए न्यायाधीश नियुक्त किए गए हैं। वह भी राज्य की सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस से पदोन्नत होकर हाईकोर्ट पहुंच रहे हैं।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में काम करने के अनुभव का लाभ उन्हें हाईकोर्ट में विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई के दौरान मिलेगा।
इस तरह एक साथ तीन न्यायिक अधिकारियों के हाईकोर्ट में पहुंचने से न्यायाधीशों की कार्यरत संख्या में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।
13 से बढ़कर 16 होगी संख्या
इन नियुक्तियों से पहले झारखंड हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस एमएस सोनक सहित कुल 13 न्यायाधीश कार्यरत बताए गए थे। तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद यह संख्या बढ़कर 16 हो जाएगी।
हालांकि हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 25 है। इस लिहाज से तीन नई नियुक्तियों के बावजूद सभी स्वीकृत पद नहीं भरेंगे।
यदि स्वीकृत संख्या 25 और कार्यरत संख्या 16 रहती है तो हाईकोर्ट में नौ पद रिक्त रहेंगे। यानी नई नियुक्तियों से रिक्तियों की संख्या कम जरूर होगी, लेकिन न्यायाधीशों की पूरी स्वीकृत क्षमता अभी भी उपलब्ध नहीं होगी।
लंबित मामलों की सुनवाई में मिलेगी मदद
हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने का सीधा असर उपलब्ध न्यायिक पीठों की संख्या पर पड़ सकता है। नई नियुक्तियों के बाद अलग-अलग प्रकृति के मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त पीठ गठित करने में सुविधा हो सकती है।
झारखंड हाईकोर्ट में दीवानी, आपराधिक, सेवा संबंधी, संवैधानिक, जनहित याचिका और राज्य सरकार से संबंधित विभिन्न मामलों की सुनवाई होती है।
न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या कम होने पर मौजूदा पीठों पर मामलों का दबाव बढ़ सकता है।
तीन नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के बाद मामलों के आवंटन और पीठों के गठन में हाईकोर्ट प्रशासन को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
कॉलेजियम ने की थी तीनों नामों की सिफारिश
हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है। न्यायिक सेवा से किसी अधिकारी को हाईकोर्ट में पदोन्नत किए जाने के प्रस्ताव पर संबंधित स्तरों पर विचार किया जाता है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा के नामों पर विचार करने के बाद उनकी नियुक्ति की अनुशंसा की थी।
कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया केंद्र सरकार के स्तर पर आगे बढ़ी। अब अधिसूचना जारी होने के साथ तीनों की नियुक्ति औपचारिक रूप से हो गई है।
जिला न्यायपालिका से हाईकोर्ट तक का सफर
तीनों नए न्यायाधीशों का चयन न्यायिक सेवा कोटे से हुआ है। हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए न्यायिक सेवा के अनुभवी अधिकारियों के साथ अधिवक्ताओं के नामों पर भी अलग-अलग प्रक्रिया के तहत विचार किया जाता है।
जिला न्यायपालिका से आने वाले न्यायाधीश अपने साथ निचली अदालतों में मामलों की सुनवाई और न्यायिक प्रशासन का व्यापक अनुभव लेकर आते हैं।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला स्तर पर न्यायपालिका के महत्वपूर्ण पदों में से एक है। ऐसे अधिकारियों को जिला न्यायालयों में न्यायिक कार्यों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी अनुभव होता है।
अभी भी नौ पद रहेंगे खाली
झारखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के 25 स्वीकृत पद होने के मुकाबले नई नियुक्तियों के बाद कार्यरत संख्या 16 होने पर नौ पद रिक्त रहेंगे।
इन रिक्तियों को भरने के लिए आगे भी नियुक्ति प्रक्रिया जारी रह सकती है। न्यायाधीशों की उपलब्धता बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी और लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद रहती है।
हालांकि लंबित मामलों के निस्तारण की गति केवल न्यायाधीशों की संख्या पर निर्भर नहीं करती। न्यायिक आधारभूत संरचना, कर्मचारियों की उपलब्धता, मुकदमों की प्रकृति और प्रक्रियागत कारण भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल तीन नई नियुक्तियों से झारखंड हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता बढ़ी है। मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा के शपथ ग्रहण एवं कार्यभार संभालने के बाद हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 16 हो जाएगी। इसके साथ ही जिला न्यायपालिका के तीन अनुभवी अधिकारी अब राज्य की सर्वोच्च अदालत में न्यायिक जिम्मेदारी निभाते नजर आएंगे।