धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले में जमीन धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। शनिवार को कुसुंडा एरिया के गोधर छह नंबर बीसीसीएल कॉलोनी और हवा चानक के पास कुछ ही घंटों के अंतराल में भू-धंसान की दो घटनाओं ने इलाके में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अचानक जमीन धंसने से लोगों में दहशत का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब छह बजे पहली घटना गोधर छह नंबर बीसीसीएल कॉलोनी में हुई। यहां भू-धंसान के कारण कई आवास क्षतिग्रस्त हो गए और सड़क भी धंस गई। इसके बाद करीब साढ़े पांच घंटे बाद सुबह 11:30 बजे हवा चानक के पास कॉलोनी की मुख्य पीसीसी सड़क जमीन में समा गई।
सड़क करीब 35 फीट नीचे चली गई
हवा चानक के पास हुई दूसरी घटना में कॉलोनी को जोड़ने वाली मुख्य पीसीसी सड़क करीब सात मीटर की परिधि में धंस गई। जमीन धंसने के बाद सड़क का बड़ा हिस्सा करीब 35 फीट नीचे चला गया।
घटना के तुरंत बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क धंसने के बाद वहां से तेजी से गैस का रिसाव भी होने लगा। गैस रिसाव के कारण आसपास रहने वाले लोगों में भय का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी, जिसके बाद स्थिति का जायजा लेने के लिए टीमों को भेजा गया।
गोधर क्षेत्र पहले से संवेदनशील
गोधर क्षेत्र में भू-धंसान की घटनाएं नई नहीं हैं। यह पूरा इलाका कोयला खनन क्षेत्र से प्रभावित माना जाता है। भूमिगत खदानों और लंबे समय से चल रही खनन गतिविधियों के कारण कई जगहों पर जमीन कमजोर हो चुकी है।
गोधर से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित केंदुआडीह क्षेत्र भी पहले से भू-धंसान और गैस रिसाव की समस्या से जूझ रहा है। यहां कई बार जमीन धंसने और जहरीली गैस निकलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के कई इलाके अब असुरक्षित होते जा रहे हैं और लोगों को लगातार खतरे के बीच जीवन बिताना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों ने बताया बेहद खतरनाक क्षेत्र
भू-धंसान की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विशेषज्ञों की रिपोर्ट में भी इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील और खतरनाक बताया गया है।
हाल ही में केंदुआडीह में हुई भू-धंसान की घटना के बाद विशेषज्ञों से क्षेत्र का अध्ययन कराया गया था। जांच में जमीन की स्थिति और खनन गतिविधियों से जुड़े जोखिमों का आकलन किया गया।
विशेषज्ञों ने ऐसे इलाकों में लगातार निगरानी रखने और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की जरूरत बताई है।
लोगों में बढ़ी चिंता
शनिवार को हुई दो घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में डर बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि जमीन कब और कहां धंस जाए, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों की नियमित जांच होनी चाहिए और खतरे वाले इलाकों में रहने वाले परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
बीसीसीएल और प्रशासन के सामने चुनौती
धनबाद में कोयला खनन से जुड़े क्षेत्रों में भू-धंसान लंबे समय से बड़ी समस्या बनी हुई है। बीसीसीएल और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अधिकारियों का कहना है कि भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोगों की मांग है कि सिर्फ घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से सुरक्षा उपाय किए जाएं।
लगातार बढ़ रही घटनाएं चिंता का विषय
धनबाद कोयला क्षेत्र में जमीन धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई बार सड़कें, मकान और अन्य संरचनाएं इसकी चपेट में आ चुकी हैं।
शनिवार की घटनाओं ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। गोधर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब प्रशासन से स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
फिलहाल दोनों घटनाओं के बाद प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। गैस रिसाव और जमीन की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।