धनबाद। मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी (एमडीआर टीबी) से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत धनबाद में अब नई और प्रभावी बी-पालम चिकित्सा पद्धति की शुरुआत कर दी गई है। इस आधुनिक उपचार पद्धति से गंभीर टीबी मरीजों को लंबे समय तक चलने वाले इलाज, कई तरह की दवाओं और दर्दनाक इंजेक्शन से राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले एमडीआर टीबी के मरीजों को ठीक होने में 18 से 24 महीने तक का लंबा समय लग जाता था। इस दौरान मरीजों को कई प्रकार की दवाएं लेनी पड़ती थीं और नियमित रूप से इंजेक्शन भी लगवाने पड़ते थे। लंबे इलाज और दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण कई मरीज बीच में ही इलाज छोड़ देते थे, जिससे बीमारी के पूरी तरह ठीक होने में परेशानी आती थी।
नई बी-पालम चिकित्सा पद्धति ने इस प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। अब एमडीआर टीबी मरीजों का इलाज केवल छह महीने में पूरा किया जा सकेगा। इस उपचार में मरीजों को इंजेक्शन लेने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें सिर्फ चार प्रमुख दवाओं के माध्यम से इलाज दिया जाएगा।
बी-पालम पद्धति में बेडाक्विलाइन, प्रेटोमैनिड, लिनेजोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इससे पहले मरीजों को आइसोनियाज़िड, रिफैम्पिसिन, पाइराज़ीनामाइड, एथेमबुटोल और स्ट्रेप्टोमाइसिन जैसी दवाएं और इंजेक्शन लेने पड़ते थे। नई व्यवस्था में पुराने कठिन उपचार की जगह कम समय और कम परेशानी वाला विकल्प उपलब्ध कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, धनबाद जिले में वर्तमान समय में करीब 3,400 टीबी मरीज हैं। इनमें लगभग 110 मरीज ड्रग रेसिस्टेंट यानी एमडीआर टीबी की गंभीर श्रेणी से प्रभावित हैं। इन सभी नए ड्रग रेसिस्टेंट मरीजों को अब बी-पालम पद्धति का लाभ दिया जा रहा है, जिससे उन्हें जल्द स्वस्थ होने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इलाज की अवधि कम होने से मरीजों के बीच दवा छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी आएगी। लंबे समय तक दवा लेने की परेशानी कम होगी और मरीज नियमित रूप से अपना उपचार पूरा कर सकेंगे। इससे टीबी के खिलाफ चल रही लड़ाई को मजबूती मिलेगी और बीमारी को नियंत्रित करने में सफलता मिलेगी।
टीबी मरीजों को आर्थिक सहायता देने के लिए सरकार की ओर से निक्षय पोषण योजना भी संचालित की जा रही है। इसके तहत पात्र मरीजों को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे इलाज के दौरान पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बी-पालम थेरेपी देश को टीबी मुक्त बनाने के अभियान में एक महत्वपूर्ण कदम है। कम अवधि के इलाज और आसान दवा व्यवस्था के कारण मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही टीबी से पूरी तरह ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एमडीआर टीबी का समय पर इलाज बेहद जरूरी है। अगर मरीज नियमित रूप से दवाएं लेते हैं और डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हैं तो बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। नई बी-पालम पद्धति गंभीर टीबी मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।
धनबाद में इस नई चिकित्सा व्यवस्था की शुरुआत से स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में एमडीआर टीबी के मामलों में बेहतर उपचार परिणाम देखने को मिलेंगे और टीबी उन्मूलन अभियान को नई गति मिलेगी।