राँची न्यूज़: स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने अधिकारियों से कहा कि जन आंदोलन के रूप में अभियान चलाकर राज्य से मिजल्स रूबेला को खत्म करना होगा. उन्होंने मिजल्स रूबेला के मामले में झारखंड का देश में तीसरा स्थान होने पर चिंता जताई.
कहा कि जब आपके अंदर यह भावना आएगी कि समाज को कुछ देना है, तभी बेहतर ढंग से काम कर पाएंगे. पल्स पोलियो अभियान की तरह चैलेंज लेकर इसे भी खत्म करना है. राज्य के नौ जिलों में अप्रैल से चलने वाले मिजल्स रूबेला टीकाकरण अभियान को लेकर एक होटल में आयोजित कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव ने अभियान को लेकर दो स्लोगन हर घर का बच्चा टीका पाए, कोई बच्चा छूट न जाए और हम सबने ठाना है, मिजिल्स रूबेला से झारखंड को बचाना है दिया.
कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और डब्ल्यूएचओ के सहयोग से किया जा रहा है. कार्यशाला में प्रतिभागी के रूप में सभी जिलों से डीआरसीएचओ और मिजिल्स रूबेला प्रभावित 9 जिलों के डेटा मैनेजर शामिल थे. इस अवसर पर अपर अभियान निदेशक विद्या नंद शर्मा पंकज, निदेशक प्रमुख डॉ बीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ राकेश दयाल और डॉ आशीष सत्पथी ने भी अभियान को लेकर जानकारी दी.
45.62 लाख बच्चों का होगा टीकाकरण
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि झारखंड के 9 जिलों में मिजिल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान की शुरुआत अप्रैल में होगी. यह पांच सप्ताह तक चलेगा. इस अभियान के तहत 9 माह से 15 वर्ष तक के 45 लाख 62 हजार 492 बच्चों को टीका दिया जाएगा. अभियान में यूनिसेफ, लायंस क्लब और रोटरी क्लब का भी सहयोग लिया जा रहा है.
निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य डॉ बीरेंद्र सिंह ने कहा कि हर हाल में टीकाकरण का बेहतर कवरेज करना है. जब सभी बच्चे प्रतिरक्षित हो जाएंगे तो इस बीमारी के प्रसार की संभावना नगण्य हो जाएगी. इसके लिए टीम वर्क के तहत काम करना होगा.