रांची। झारखंड में कोयला सुरक्षा को लेकर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार को CISF की संयुक्त टीम ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के मगध क्षेत्र में पुलबसिया साइडिंग के पास अभियान चलाकर करीब 200 टन कोयला जब्त किया। संबंधित क्षेत्र में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने के बाद CISF की यह पहली बड़ी कार्रवाई बताई जा रही है।
CISF की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान के मुताबिक, इस अभियान को मगध-अमरापाली और एनके पिपरवार यूनिट की टीमों ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया। टीम ने पुलबसिया साइडिंग के आसपास कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में कोयला बरामद किया। जब्त कोयले की मात्रा करीब 200 टन बताई गई है। बल ने इसे कोयला सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता बताया है।
CISF के अनुसार, मगध और अमरापाली क्षेत्रों में उसकी औपचारिक तैनाती 19 सितंबर 2026 को हुई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की जब्ती को क्षेत्र में बल की पहली बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। CISF ने कहा है कि कार्रवाई कोयले के अवैध रिसाव और चोरी को रोकने तथा CCL की महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा के प्रयासों का हिस्सा है।
पुलबसिया साइडिंग मगध क्षेत्र के कोयला परिवहन ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय की लॉजिस्टिक्स योजना में मगध ओपनकास्ट परियोजना को उत्तर कर्णपुरा कोलफील्ड की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल किया गया है। मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार मगध परियोजना की नियोजित क्षमता 51 मिलियन टन सालाना है और इसके कोयला परिवहन नेटवर्क में पुलबसिया सहित विभिन्न रेलवे साइडिंग शामिल हैं।
इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की बरामदगी के बाद अब इस बात की जांच महत्वपूर्ण होगी कि यह कोयला वहां किस तरह पहुंचा, इसका स्रोत क्या था और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में फिलहाल किसी गिरफ्तारी या किसी व्यक्ति अथवा गिरोह की पहचान का विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए कार्रवाई को लेकर आगे की जांच और संबंधित एजेंसियों की जानकारी का इंतजार है।
कोयला उत्पादक क्षेत्रों में चोरी, अवैध निकासी और परिवहन को रोकना लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती रहा है। CCL की पुरानी वार्षिक रिपोर्ट में भी मगध-अमरापाली क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का उद्देश्य कोयले की चोरी और अन्य अवैध गतिविधियों को कम करना बताया गया था। अब CISF की तैनाती के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
CISF देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है। उसके आधिकारिक चार्टर में प्रतिष्ठानों की परिधि सुरक्षा, प्रवेश नियंत्रण, अपराध की रोकथाम और महत्वपूर्ण खेपों की सुरक्षा जैसे दायित्व शामिल हैं। ऐसे में कोयला क्षेत्रों में इसकी तैनाती का प्रमुख उद्देश्य खनन और परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखना भी है।
मगध क्षेत्र में कोयला उत्पादन और उसके परिवहन के लिए बड़े स्तर पर रेलवे तथा अन्य आधारभूत ढांचे का उपयोग किया जाता है। सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि मगध ओपनकास्ट परियोजना और अमरापाली परियोजना उत्तर कर्णपुरा क्षेत्र की बड़ी कोयला परियोजनाओं में शामिल हैं। ऐसे क्षेत्रों में खदान से साइडिंग और फिर रेल नेटवर्क तक कोयले की आवाजाही के अलग-अलग चरण होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
CISF की ताजा कार्रवाई को बल ने अपनी ‘जीरो कोल लीकेज’ नीति से भी जोड़ा है। इसका उद्देश्य खनन क्षेत्रों और परिवहन नेटवर्क में कोयले की अनधिकृत निकासी तथा नुकसान को रोकना है। बल के मुताबिक, मगध-अमरापाली और एनके पिपरवार यूनिट की संयुक्त कार्रवाई इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
करीब 200 टन कोयला जब्त होने के बाद संबंधित क्षेत्र में निगरानी और जांच बढ़ने की संभावना है। हालांकि, जब्त कोयले की कीमत, उसके स्वामित्व और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के बारे में उपलब्ध रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद कोयला किस स्रोत से आया था और क्या इसके पीछे संगठित तरीके से अवैध गतिविधि चल रही थी।
फिलहाल CISF के लिए यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मगध-अमरापाली क्षेत्र की सुरक्षा संभालने के कुछ दिनों के भीतर ही बल ने इतनी बड़ी मात्रा में कोयला जब्त किया है। सुरक्षा एजेंसी ने इसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संसाधनों और CCL की संपत्तियों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया है।
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