झारखंड

उड़ती धूल के विरोध में बालूमाथ बंद, बारिश के बीच छाता लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण

Kavita2
24 Sept 2026 12:29 PM IST
उड़ती धूल के विरोध में बालूमाथ बंद, बारिश के बीच छाता लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण
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बालूमाथ। सड़क पर लगातार उड़ती धूल से परेशान ग्रामीणों और व्यवसायियों का गुस्सा गुरुवार को सड़कों पर दिखाई दिया। धूल की समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों के आह्वान पर बालूमाथ बंद रहा। बंद का बाजार पर व्यापक असर देखने को मिला। अधिकांश दुकानों के शटर बंद रहे और आम दिनों की चहल-पहल गायब नजर आई। बारिश के बावजूद दुकानदार और ग्रामीण छाता लेकर चौक पर डटे रहे और समस्या के समाधान की मांग करते रहे।

गुरुवार सुबह से ही बालूमाथ बाजार का नजारा सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग था। जिस बाजार में रोजाना सुबह होते ही दुकानों के शटर खुल जाते हैं और वाहनों की आवाजाही के साथ कारोबार शुरू हो जाता है, वहां गुरुवार को सन्नाटा पसरा रहा। बाजार की अधिकांश दुकानें बंद रहीं। सड़क पर भी रोज की तुलना में गतिविधियां कम दिखाई दीं।

बंद का आह्वान सड़क से उड़ने वाली धूल की समस्या को लेकर किया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर वाहनों की आवाजाही होते ही बड़ी मात्रा में धूल उड़ती है। इससे दुकानदारों, राहगीरों और सड़क किनारे रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान मौसम भी खराब रहा। आसमान से बारिश की बूंदें गिरती रहीं, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी जगह से नहीं हटे। लोग छाता लेकर चौक पर खड़े रहे और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे। प्रदर्शन में स्थानीय ग्रामीणों के साथ व्यवसायियों ने भी भाग लिया।

लोगों का कहना था कि बारिश होने पर सड़क पर कीचड़ की समस्या पैदा होती है और मौसम साफ होते ही धूल उड़ने लगती है। ऐसे में स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है। धूल दुकानों और घरों तक पहुंचने के कारण लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।

व्यवसायियों के अनुसार धूल के कारण दुकानों में रखे सामान को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। सड़क से गुजरने वाले भारी और छोटे वाहनों के कारण धूल लगातार हवा में फैलती रहती है। ऐसे में ग्राहकों को भी बाजार में आने-जाने में परेशानी होती है। इसी वजह से स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर बंद के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर करने का फैसला किया।

बंद का असर बालूमाथ के प्रमुख बाजार क्षेत्रों में साफ दिखाई दिया। कई दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। सुबह से बाजार में आम दिनों की तरह ग्राहकों की भीड़ नहीं दिखाई दी। बंद के दौरान चौक पर जमा लोगों ने संबंधित अधिकारियों से समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि सड़क और धूल की समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि समय-समय पर पानी का छिड़काव जैसी व्यवस्था कुछ समय के लिए राहत दे सकती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान सड़क की स्थिति में सुधार और नियमित रखरखाव से ही संभव है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सड़क किसी भी इलाके की बुनियादी जरूरतों में शामिल होती है। यदि सड़क की हालत ऐसी हो कि लोगों को दिनभर धूल का सामना करना पड़े तो इसका असर सामान्य जनजीवन के साथ कारोबार पर भी पड़ता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और रोजाना बाजार से गुजरने वाले लोगों को भी परेशानी होती है।

गुरुवार के बंद में सबसे खास बात यह रही कि बारिश भी प्रदर्शनकारियों का हौसला नहीं तोड़ सकी। बूंदाबांदी के बीच लोग छाता लेकर चौक पर खड़े रहे। उनके चेहरे पर समस्या से पैदा हुई परेशानी साफ दिखाई दे रही थी, वहीं प्रशासन से समाधान मिलने की उम्मीद भी बनी हुई थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या को लेकर पहले भी संबंधित स्तर पर ध्यान आकर्षित कराया गया है। इसके बावजूद यदि हालात में अपेक्षित सुधार नहीं होता है तो लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क की स्थिति का निरीक्षण कराने और जल्द आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

बाजार बंद होने से स्थानीय कारोबार भी प्रभावित हुआ। आम दिनों में जहां सुबह से ही खरीदारी के लिए लोगों का आना-जाना शुरू हो जाता है, वहीं गुरुवार को ज्यादातर दुकानें बंद रहने से व्यापारिक गतिविधियां ठप रहीं। दुकानदारों का कहना है कि बंद से उन्हें आर्थिक नुकसान जरूर होता है, लेकिन धूल की समस्या से लगातार हो रही परेशानी के कारण उन्हें विरोध में शामिल होना पड़ा।

स्थानीय लोगों ने यह भी मांग की कि सड़क से धूल उड़ने की समस्या को नियंत्रित करने के लिए तत्काल प्रभाव से आवश्यक व्यवस्था की जाए। जब तक सड़क की स्थायी मरम्मत या सुधार नहीं होता, तब तक नियमित पानी का छिड़काव और अन्य जरूरी उपाय किए जाएं, ताकि बाजार और आसपास के लोगों को राहत मिल सके।

बालूमाथ बंद ने प्रशासन के सामने स्थानीय लोगों की नाराजगी को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया है। बड़ी संख्या में दुकानों का बंद रहना और बारिश के बावजूद ग्रामीणों का चौक पर डटे रहना बताता है कि धूल की समस्या को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

अब स्थानीय लोगों और व्यापारियों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। उन्हें उम्मीद है कि बंद और विरोध प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारी समस्या का संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाएंगे। फिलहाल गुरुवार को बालूमाथ बाजार में धूल के खिलाफ लोगों का विरोध प्रमुख रूप से दिखाई दिया और सामान्य दिनों की चहल-पहल की जगह बंद दुकानों और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की तस्वीर नजर आई।

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