लंदन में दिखी झारखंड की संस्कृति लोकनृत्य से याद किए गए बिरसा मुंडा
गौरव बिरसा मुंडा की कहानी ने मोहा मन
रांची : लंदन में आयोजित एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में भगवान बिरसा मुंडा की वीर गाथा गूंजी। कार्यक्रम में मौजूद करीब 3000 भारतीयों ने झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोकगीत और पारंपरिक नृत्य का आनंद लिया। झारखंड के कलाकारों की प्रस्तुति ने प्रवासी भारतीयों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विदेशों में भारतीय संस्कृति, विशेषकर झारखंड की आदिवासी विरासत और भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष एवं योगदान को लोगों तक पहुंचाना था। बिरसा मुंडा को आदिवासी अधिकारों और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
लोकनृत्य और संगीत ने मोहा मन
लंदन में हुए इस आयोजन में झारखंड के कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य प्रस्तुत किया। ढोल-मांदर की थाप और पारंपरिक धुनों पर कलाकारों की प्रस्तुति ने माहौल को पूरी तरह भारतीय रंग में रंग दिया। झारखंड के आदिवासी समाज की पहचान माने जाने वाले लोकनृत्य और संगीत में प्रकृति, परंपरा और सामुदायिक जीवन की झलक देखने को मिलती है।
बिरसा मुंडा के संघर्ष को किया याद
कार्यक्रम में भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और उनके आंदोलन पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने 19वीं सदी के अंत में आदिवासी समाज के अधिकारों, जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था। उनके नेतृत्व में हुआ ‘उलगुलान’ आंदोलन भारतीय इतिहास में आदिवासी प्रतिरोध का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
प्रवासी भारतीयों ने की सराहना
कार्यक्रम में शामिल भारतीय समुदाय के लोगों ने झारखंड की संस्कृति की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने कहा कि विदेश में रहते हुए भी ऐसी प्रस्तुतियां उन्हें अपनी मिट्टी और परंपराओं से जोड़ती हैं। झारखंड की कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने से कलाकारों में भी उत्साह देखने को मिला।
विदेशों में बढ़ रही भारतीय संस्कृति की पहचान
भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराएं अब दुनियाभर में अपनी पहचान बना रही हैं। अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम विदेशों में भारतीय समुदाय को अपनी विरासत से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं। लंदन का यह आयोजन भी इसी दिशा में एक प्रयास रहा, जहां भगवान बिरसा मुंडा की गाथा और झारखंड की लोक संस्कृति ने हजारों लोगों को प्रभावित किया।