झारखंडः हजारीबाग-चतरा में सुरक्षाबलों का 'ऑपरेशन कोटिनीर', 4 खूंखार माओवादी ढेर

Update: 2026-04-17 14:28 GMT
Ranchi/Chatra रांची/चतरा। झारखंड में नक्सल उन्मूलन के अभियान में सुरक्षाबलों को शुक्रवार को बड़ी सफलता हाथ लगी है। चतरा और हजारीबाग जिले की सीमा पर स्थित 'बटुका-खपिया' के घने जंगलों में हुई भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमेटी सदस्य 15 लाख के इनामी सहदेव महतो समेत चार नक्सलियों को मार गिराया है।
सहदेव महतो के खिलाफ कुल 42 मामला दर्ज थे और चाईबासा जेल ब्रेक का अभियुक्त था। मारे गए बाकी तीन नक्सलियों की पहचान 10 लाख का इनामी जोनल कमेटी सदस्य रंजीत गंझू (9 मामले दर्ज), सहदेव महतो की पत्नी और सब-जोनल कमेटी सदस्य नताशा (17 मामले दर्ज) और 1 लाख का इनामी एरिया कमांडर बुधन करमाली (10 मामले दर्ज) के रूप में हुई है।
इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन कोटिनीर' के तहत अंजाम दिया गया, जिससे हजारीबाग-चतरा सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी दस्ते को करारा झटका लगा है। सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार और पुलिस मुख्यालय के आधिकारिक सूत्रों ने इस मुठभेड़ और मारे गए नक्सलियों की पहचान की पुष्टि कर दी है। सुरक्षाबलों को सटीक खुफिया सूचना मिली थी कि सहदेव महतो अपने दस्ते के साथ केरेडारी और पिपरवार थाना क्षेत्र के सीमावर्ती जंगलों में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रचने के लिए इकट्ठा हुआ है।
इस सूचना पर 209 कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस के संयुक्त बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी शुरू की। शुक्रवार दोपहर जैसे ही सुरक्षा बल खपिया-बटुका क्षेत्र के करीब पहुंचे, नक्सलियों ने खुद को घिरा पाकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और घंटों चली मुठभेड़ के बाद चारों नक्सलियों को ढेर कर दिया। मुठभेड़ के बाद चलाए गए गहन सर्च ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने चारों नक्सलियों के शव बरामद किए। घटनास्थल से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा मिला है, जिसमें दो एके-47 राइफल, एक कोल्ट एआर-15 राइफल और एक इंसास राइफल के साथ बड़ी मात्रा में कारतूस और अन्य सामग्री शामिल है।
पुलिस के अनुसार, सहदेव महतो लंबे समय से चतरा, हजारीबाग और लातेहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंक का पर्याय बना हुआ था। सुरक्षाबलों का मानना है कि इस सफल अभियान से पारसनाथ-लुगूझुमरा और हजारीबाग-चतरा कॉरिडोर में सक्रिय माओवादी नेटवर्क लगभग ध्वस्त हो गया है। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है।
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