ओपन जेल सुविधाओं पर कोर्ट ने उठाए सवाल

Update: 2026-07-02 09:55 GMT

रांची, झारखंड। हजारीबाग स्थित ओपन जेल की सुविधाओं, प्रबंधन और मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए 20 जुलाई तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में अदालत में चल रहा है।

चीफ जस्टिस एमएस सौनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने सरकार को स्पष्ट कहा कि ओपन जेलों की मौजूदा स्थिति, वहां उपलब्ध सुविधाओं और प्रबंधन व्यवस्था की पूरी जानकारी रिपोर्ट में शामिल की जाए, ताकि आगे आवश्यक निर्देश जारी किए जा सकें।

इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया था। इस समिति का कार्य राज्य की सभी ओपन जेलों की स्थिति, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करना है। अदालत ने यह भी कहा था कि जेलों के संचालन में पारदर्शिता और मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सभी राज्यों को ओपन जेलों की व्यवस्था सुधारने के लिए निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने कहा था कि ओपन जेलों का उद्देश्य केवल कैदियों को रखना नहीं है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और पुनर्वास की दिशा में काम करना भी है।

इसी निर्देश के तहत झारखंड हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए यह जनहित याचिका दर्ज की है। अदालत का मानना है कि ओपन जेलों में बंदियों को बेहतर सुविधाएं और सुधारात्मक माहौल मिलना जरूरी है।

अब सरकार को 20 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसके बाद अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ओपन जेल व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मानवीय बनाने की दिशा में नए निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

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