झारखंड में बड़ा बदलाव: DGP के सामने 16 कुख्यात माओवादियों का आत्मसमर्पण

Update: 2026-07-28 05:38 GMT

झारखंड : माओवादी संगठन के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच मंगलवार को पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता सामने आने वाली है। झारखंड पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष राज्य के 16 कुख्यात पुरुष और महिला माओवादी आत्मसमर्पण करेंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी अपने साथ बड़ी संख्या में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी पुलिस के हवाले करेंगे।

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लंबे समय से प्रतिबंधित संगठन से जुड़े रहे हैं और राज्य के अलग-अलग जिलों में सक्रिय गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इनके आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

इंसास और एके-47 समेत 11 हथियार सौंपेंगे

आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान माओवादी पुलिस के सामने कुल 11 हथियार जमा करेंगे। इनमें इंसास राइफल और एके-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मैगजीन और कारतूस भी पुलिस को सौंपे जाएंगे।

जानकारी के अनुसार, माओवादी 38 मैगजीन और 1562 कारतूस पुलिस के हवाले करेंगे। इतनी बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद का आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम नक्सल विरोधी अभियान की सफलता और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के प्रभाव को दर्शाता है।

कई जिलों में सक्रिय रहे हैं माओवादी

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी झारखंड के कई संवेदनशील जिलों से जुड़े हुए हैं। इनमें पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रांची, गिरिडीह, बोकारो, लातेहार और खूंटी जिले के माओवादी शामिल हैं। इसके अलावा ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के रहने वाले माओवादी भी आत्मसमर्पण करेंगे।

इन क्षेत्रों में लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का प्रभाव रहा है। सुरक्षा बलों ने इन इलाकों में लगातार अभियान चलाकर संगठन की गतिविधियों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया है।

पुलिस के अभियान को मिलेगी मजबूती

माओवादियों का आत्मसमर्पण झारखंड पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए अभियान चला रही हैं। इसमें सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ-साथ आत्मसमर्पण नीति की भी अहम भूमिका रही है।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जब सक्रिय माओवादी मुख्यधारा में लौटते हैं तो इससे अन्य सदस्यों को भी संगठन छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

पुनर्वास नीति के जरिए मुख्यधारा में लौटने का अवसर

झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने जैसे प्रयास किए जाते हैं।

पुलिस लगातार माओवादी संगठनों से जुड़े लोगों से अपील करती रही है कि वे हथियार छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटें। अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वालों को कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा।

सुरक्षा बलों की रणनीति का असर

झारखंड में माओवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल लगातार संयुक्त अभियान चला रहे हैं। जंगल और पहाड़ी इलाकों में चलाए गए अभियानों के साथ-साथ खुफिया तंत्र को भी मजबूत किया गया है।

सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति केवल मुठभेड़ और कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के प्रभाव को कम करने और सदस्यों को वापस समाज से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

आत्मसमर्पण से बदलेगी कई इलाकों की तस्वीर

माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक भय और असुरक्षा का माहौल रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में माओवादियों का आत्मसमर्पण स्थानीय लोगों के लिए राहत की खबर है। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

पुलिस का मानना है कि माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्यों के मुख्यधारा में लौटने से ग्रामीण क्षेत्रों में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।

डीजीपी के सामने होगा औपचारिक कार्यक्रम

मंगलवार को झारखंड पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में डीजीपी की मौजूदगी में सभी 16 माओवादी औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण करेंगे। इस दौरान पुलिस अधिकारी आत्मसमर्पण करने वालों से जुड़ी जानकारी और आगे की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दे सकते हैं।

हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने की यह घटना झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पुलिस अब संगठन के अन्य सदस्यों से भी हथियार छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में लौटने की अपील कर रही है।

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