Jharkhand : दामोदर नदी में प्रदूषण और अवैध कोयला खनन पर सरयू राय ने जताई चिंता

Update: 2026-06-24 06:01 GMT

Jharkhand झारखंड : दामोदर नदी के बढ़ते प्रदूषण और अवैध कोयला खनन को लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए हैं। झारखंड विधानसभा की पर्यावरण बचाओ समिति के अध्यक्ष और जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि धनबाद और बोकारो क्षेत्र की नदियों का अस्तित्व लगातार खतरे में पड़ता जा रहा है।

सरयू राय ने कहा कि अवैध कोयला खनन अब दामोदर नदी के भीतर और उसके किनारों तक पहुंच चुका है, जिससे नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, कई स्थानों पर नदी के अंदर और आसपास अवैध तरीके से कोयला निकाला जा रहा है, जो पर्यावरण और जल स्रोत दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

इस मौके पर समिति के पदाधिकारी और जरमुंडी विधायक देवेंद्र कुंवर भी उनके साथ मौजूद थे। दोनों जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और अवैध खनन की गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की।

सरयू राय ने कहा कि दामोदर नदी झारखंड की एक महत्वपूर्ण नदी प्रणाली है, जो न केवल जल आपूर्ति का स्रोत है बल्कि औद्योगिक और कृषि गतिविधियों के लिए भी अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में इसका लगातार प्रदूषित होना और अवैध खनन से प्रभावित होना गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में नदी का अस्तित्व और अधिक संकट में आ सकता है। अवैध खनन से न केवल नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है, बल्कि आसपास के पर्यावरण और जैव विविधता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि दामोदर बेसिन पहले से ही औद्योगिक प्रदूषण के कारण दबाव में है और अब अवैध खनन की गतिविधियां इसे और अधिक गंभीर स्थिति में ले जा रही हैं। नदी के किनारे बने औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला कचरा और खनन गतिविधियां मिलकर स्थिति को और बिगाड़ रही हैं।

सरयू राय ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए और अवैध खनन पर तुरंत रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है, ताकि नदी प्रणाली को बचाया जा सके।

विधायक ने यह भी संकेत दिया कि पर्यावरण बचाओ समिति इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आगे सरकार को सिफारिशें सौंपेगी। उनका कहना है कि नदियों को बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन, उद्योगों और समाज सभी को मिलकर काम करना होगा।

इस मुद्दे पर स्थानीय लोगों में भी चिंता देखी जा रही है, क्योंकि दामोदर नदी क्षेत्र के कई गांव और शहर इसकी स्थिति से सीधे प्रभावित होते हैं। पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता पर भी असर पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, दामोदर नदी में बढ़ते प्रदूषण और अवैध कोयला खनन का मामला अब गंभीर पर्यावरणीय संकट का रूप लेता जा रहा है, जिसे रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदमों की आवश्यकता बताई जा रही है।

Tags:    

Similar News