Ranchi रांची। झारखंड में JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने छात्रों से प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लेने की अपील की है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनो ने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों पर समाधान निकालने के लिए लगातार तीन दिनों तक मैराथन बैठकें कीं और कई मुद्दों पर पर्याप्त लचीलापन दिखाया। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किए गए प्रयासों के बावजूद छात्र संगठन पूरी तरह सहमत नहीं हो सके।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनो ने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान करना और विवाद को बातचीत के जरिए खत्म करना है। उन्होंने बताया कि छात्र संगठनों के साथ लगातार चर्चा की गई और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया। सरकार ने कई मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास किया, लेकिन इसके बावजूद प्रस्तावित प्रदर्शन को पूरी तरह टालने पर सहमति नहीं बन सकी।
JPSC की 14वीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि जैसे ही परीक्षा में गड़बड़ी के संकेत सामने आए, मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने तत्काल कदम उठाए। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के तहत छापेमारी की गई और डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्य जब्त किए गए। इसके अलावा संदिग्ध लोगों की पहचान भी की गई।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की दिशा में तेजी से कार्रवाई की। उन्होंने यह भी बताया कि JPSC के अध्यक्ष और सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। सरकार की ओर से इसे परीक्षा व्यवस्था में सामने आई शिकायतों पर उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों में शामिल बताया गया है। छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों की जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और भविष्य में ऐसी समस्याओं को रोकने के लिए ठोस सुधार की मांग की जा रही है। सरकार और छात्रों के बीच हुई बैठकों में इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनो ने कहा कि सरकार ने छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्र संगठन सरकार के प्रयासों को समझेंगे और बातचीत के माध्यम से बाकी मुद्दों का समाधान निकालने में सहयोग करेंगे। फिलहाल छात्रों के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर रांची प्रशासन भी सतर्क है। सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बनने से आंदोलन को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि छात्र संगठन अपने प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर क्या फैसला लेते हैं और सरकार आगे क्या कदम उठाती है।