मुस्लिम घुसपैठिए भारत में आए तो खोजकर वापस भेजा जाएगा : केशव प्रसाद मौर्य

Update: 2025-11-24 18:33 GMT
Jharkhand झारखंड: स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के मतदाता सूची और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) से जुड़े बयान पर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। अंसारी ने एक जनसभा में कहा था कि एसआईआर मतदाता सूची से विपक्ष के लोगों के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है और यदि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) उनके घर आए तो उसे बंधक बनाने की बात भी कही। इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस तरह की बातें करने वाले दल और नेता शायद एसआईआर की सच्चाई को समझने का प्रयास नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि एसआईआर संविधान की दृष्टि से जरूरी है और इसका उद्देश्य फर्जी मतदान रोकना, बूथ पर कब्जा करने वालों और घुसपैठियों को सूची से हटाना है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मृतक लोगों के नाम हटाना और योग्य नए मतदाताओं के नाम जोड़ना आवश्यक है। इसके अलावा, जिन लोगों के नाम एक से अधिक स्थानों पर हैं, उन्हें एक ही स्थान पर सीमित किया जाएगा।
घुसपैठियों को डिटेंशन सेंटर में रखने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर मौर्य ने कहा कि भारत और उत्तर प्रदेश धर्मशाला नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के धर्मों—सिख, ईसाई, हिंदू और बौद्ध—के लोगों को पनाह दी जाएगी, लेकिन किसी भी बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए को भारत में नहीं रहने दिया जाएगा और उन्हें वापस भेजा जाएगा।
इस विवाद के बीच इरफान अंसारी ने बयान की सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल फर्जी बीएलओ और ग्रामीणों को डराने, धमकाने की घटनाओं के बारे में बात की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ संदिग्ध लोग नकली बीएलओ बनकर ग्रामीणों से पैसे वसूलने की कोशिश कर रहे थे। अंसारी ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले की जानकारी जामताड़ा उपायुक्त को दी थी और इस पर विशेष निगरानी रखने का अनुरोध किया था। राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर दोनों पक्षों के बीच गर्मजोशी जारी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अंसारी ने अपनी बात को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया है, जबकि विपक्षी नेताओं का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में कुछ विरोधाभास हैं और उन्हें सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
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