स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सावधानी की अपील

Update: 2026-07-22 14:04 GMT

जमशेदपुर। बारिश के मौसम और बदलते तापमान के बीच जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में बच्चों में बुखार के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। शहर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में हर दिन बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बीमार बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मानसून के दौरान बच्चों में वायरल संक्रमण के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में किसी भी बुखार को सामान्य समझकर इलाज करना खतरनाक हो सकता है।

महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल समेत शहर के कई स्वास्थ्य केंद्रों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, ओपीडी में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या में बच्चे मौसम से जुड़ी बीमारियों से प्रभावित पाए जा रहे हैं। डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चे को बुखार आने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और बिना जांच के कोई भी दवा न दें।

चिकित्सकों का कहना है कि हर बुखार वायरल नहीं होता। मानसून के समय कई गंभीर बीमारियों के शुरुआती लक्षण एक जैसे दिखाई देते हैं। डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य संक्रमणों में शुरुआत में तेज बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन इन सभी बीमारियों का इलाज अलग-अलग तरीके से किया जाता है। इसलिए बिना जांच के बीमारी का अनुमान लगाकर दवा देना बच्चे की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

डॉक्टरों ने बताया कि कई बार अभिभावक बच्चे को बुखार आने पर खुद ही मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर देना शुरू कर देते हैं। खासतौर पर एंटीबायोटिक और दर्द की दवाओं का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के करना खतरनाक हो सकता है। इससे बीमारी का सही कारण पता लगाने में देरी होती है और कई बार स्थिति गंभीर भी हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा या गलत एंटीबायोटिक लेने से शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। इसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है। भविष्य में जब किसी गंभीर संक्रमण का इलाज करना हो तो ऐसी स्थिति में दवाओं का असर कम हो सकता है और इलाज मुश्किल हो सकता है।

डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में कुछ विशेष लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल जाएं। लगातार तेज बुखार रहना, ठंड लगना, शरीर में ज्यादा कमजोरी या सुस्ती, उल्टी होना, खाना खाने में मन नहीं लगना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

मानसून के दौरान बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि जमा पानी में मच्छर तेजी से पनपते हैं। डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या बारिश के मौसम में बढ़ जाती है।

अभिभावकों को सलाह दी गई है कि बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और साफ पानी का सेवन कराएं। बच्चों को हल्का और पौष्टिक भोजन देने के साथ उनकी सेहत पर लगातार नजर रखें।

डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के मौसम में सावधानी और समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव है। बुखार को मामूली समझकर घर पर इलाज करने के बजाय विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है, ताकि बच्चों को डेंगू, मलेरिया और अन्य गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।

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