Jharkhand: रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र अंतर्गत चितरपुर गांगी जमुनी में सरसों तेल की संदिग्ध रिपैकेजिंग का मामला सामने आया है। सूचना के आधार पर फूड सेफ्टी विभाग ने बुधवार को आदर्श राज जनरल स्टोर पर छापेमारी की, जहां बड़ी मात्रा में सरसों तेल और उससे जुड़ी पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान दुकान में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फूड सेफ्टी विभाग को सूचना मिली थी कि इस प्रतिष्ठान में बड़े पैक के सरसों तेल को छोटे-छोटे पैकेटों में भरकर बेचा जा रहा है। इसके बाद फूड सेफ्टी ऑफिसर डेरिक तिग्गा और लुकेश रब्बानी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। रजरप्पा थाना पुलिस के अधिकारी भी इस कार्रवाई में शामिल रहे। टीम ने दुकान और गोदाम में रखे तेल के कार्टून, पैकेट और अन्य सामग्री की जांच की। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले कि तेल की रिपैकेजिंग की जा रही थी, हालांकि इसकी पुष्टि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। विभाग ने मौके से सरसों तेल का नमूना लेकर जांच के लिए लैब भेज दिया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि संबंधित दुकान के पास खाद्य सुरक्षा विभाग का वैध फूड लाइसेंस नहीं था। इस पर विभाग ने नोटिस जारी करते हुए 30 दिनों के भीतर लाइसेंस बनवाने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा में लाइसेंस नहीं लेने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। छापेमारी के दौरान टीम को रिपैकेजिंग मशीन और बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री भी मिली। विभाग का कहना है कि पूरे मामले की जांच गहनता से की जा रही है और किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
यह कार्रवाई उस समय और महत्वपूर्ण हो गई है जब हाल ही में पलामू जिले में मिलावटी तेल से जुड़े मामले में एक परिवार की मौत की घटना सामने आई थी। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग राज्यभर में निगरानी और सख्ती बढ़ा रहा है। फूड सेफ्टी अधिकारी डेरिक तिग्गा ने दुकानदारों और कारोबारियों से अपील की कि वे केवल अधिकृत स्रोत से लाइसेंस प्राप्त करें और किसी भी बिचौलिये के झांसे में न आएं। उन्होंने बताया कि कई जगह फर्जी एजेंट फूड लाइसेंस के नाम पर पैसे वसूल रहे हैं, जबकि असली लाइसेंस केवल विभागीय कार्यालय से ही जारी किया जाता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिना लाइसेंस खाद्य कारोबार करना कानूनन अपराध है, जिसमें पांच लाख रुपये तक का जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है। विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना भी है। फूड सेफ्टी विभाग ने कहा है कि आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी और छापेमारी अभियान जारी रहेगा, ताकि मिलावट और अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।