CII के पूर्वी शिखर सम्मेलन में झारखंड के विकास के रोडमैप पर हुई चर्चा
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) झारखंड की ओर से रांची में पूर्वी भारत शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया
Jamshedpur : भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) झारखंड की ओर से रांची में पूर्वी भारत शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में झारखंड के विकास के रोडमैप पर चर्चा की गई. झारखंड के लिए एक सतत बुनियादी ढांचा बनाने पर विचार-विमर्श किया गया. सीआईआई झारखंड के अध्यक्ष और हाईको इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक तापस साहू ने कहा कि झारखंड में उद्योग को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) की कुल लंबाई 3,366.76 किलोमीटर है जबकि राज्य के राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 6,880 किलोमीटर है. बजट 2022-23 के तहत राज्य में सड़कों और पुलों की परियोजनाओं के लिए 3,840 करोड़ आवंटित किए गए हैं. जुलाई 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16800 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला रखी. उन्होंने कहा कि परियोजनाओं से झारखंड की आधुनिक कनेक्टिविटी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आस्था और पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा.
झारखंड में उद्योग की अपार संभावनाएं-वंदना दादेल
झारखंड की उद्योग सचिव वंदना दादेल ने बताया कि झारखंड में ऑटो, इंजीनियरिंग, कपड़ा और पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने सीआईआई को कुछ विशिष्ट परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार के साथ सहयोग करने की सलाह दी. कहा कि झारखंड में औद्योगीकरण की अपार संभावनाएं हैं. झारखंड तसर रेशम के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है. रेशम उत्पादन, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी, कपड़ा आदि पर जोर दिया जा सकता है. सरकार का उद्देश्य निवेश को अधिकतम करने के लिए उद्योग के अनुकूल वातावरण बनाना है, विशेष रूप से खनिज और प्राकृतिक संसाधन आधारित उद्योगों, एमएसएमई, बुनियादी ढांचे के विकास और बीमार इकाइयों के पुनर्वास को लेकर.
झारखंड की क्षमता का विकास करना होगा-नीरजकांत
सीआईआई झारखंड के पूर्व अध्यक्ष और तार कंपनी के प्रबंध निदेशक नीरज कांत ने कहा कि इस्ट इंडिया शिखर सम्मेलन आयोजित करने का सीआईआई का मकसद क्षेत्र की क्षमता का प्रदर्शन करना है और साथ ही इस क्षेत्र में निवेशकों की रुचि को आमंत्रित करना है. केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित नीतियों का लाभ उठाते हुए पीपीपी माध्यम से बुनियादी ढांचे का विकास करना है.
Rakesh