रांची : झारखंड के परिवहन विभाग को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितता सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 से 2024 के बीच राज्य के पांच जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र के 305 नाबालिगों को गियर वाली मोटरसाइकिल चलाने के ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर दिए गए।
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि मोटर वाहन नियमों के तहत नाबालिगों को इस तरह के वाहनों के लिए लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता। ऑडिट में सामने आई इस गड़बड़ी ने लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सारथी पोर्टल की तकनीकी कमी का फायदा
CAG की रिपोर्ट के अनुसार, लाइसेंस जारी करने में इस्तेमाल होने वाले सारथी पोर्टल की तकनीकी कमियों के कारण यह गड़बड़ी संभव हुई। सिस्टम में उम्र और वाहन श्रेणी से संबंधित जरूरी जांच प्रभावी तरीके से नहीं हो सकी, जिसके चलते नाबालिग आवेदकों को गियर वाली मोटरसाइकिल के लाइसेंस जारी कर दिए गए।
ऑडिट में यह भी सामने आया कि विभाग की ओर से ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था में कमियां थीं। राज्य में स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थापित नहीं होने के कारण कई जगह अस्थायी और मानकों पर खरे न उतरने वाले ट्रैक पर परीक्षण किए गए।
सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल
नाबालिगों को गियर वाली बाइक का लाइसेंस मिलना सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा से जुड़ा मामला है। कम उम्र में भारी या गियर वाले दोपहिया वाहन चलाने से दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में लाइसेंस जारी करने से पहले उम्र, दस्तावेज और ड्राइविंग क्षमता की जांच बेहद जरूरी है।
CAG की रिपोर्ट में परिवहन विभाग की व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक और बेहतर डिजिटल निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू होने से इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने में मदद मिल सकती है।
सिर्फ लाइसेंस ही नहीं, परिवहन विभाग में कई अनियमितताएं
ऑडिट में परिवहन विभाग से जुड़े कई अन्य मामलों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2024 के बीच लर्निंग लाइसेंस के नाम पर वेंडर्स द्वारा नियमों के विपरीत 4.09 करोड़ रुपये की वसूली की गई। इसके अलावा वाहनों के स्थायी पंजीकरण, टैक्स वसूली और फिटनेस प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों में भी अनियमितताएं सामने आईं।
CAG के मुताबिक, इन खामियों को दूर करने के लिए विभाग को लाइसेंस प्रक्रिया की निगरानी मजबूत करने, स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थापित करने और डिजिटल सिस्टम में जरूरी सुरक्षा जांच लागू करने की जरूरत है। 305 नाबालिगों को गियर वाली बाइक का लाइसेंस जारी होने का मामला झारखंड की परिवहन व्यवस्था में डिजिटल और प्रशासनिक निगरानी की गंभीर कमी को सामने लाता है।
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