सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री के आरोप पर अंचल प्रशासन सख्त, तीन एकड़ भूमि की जांच शुरू
पोटका। धीरोल पंचायत के बांगो टोला नूतनडीह में सरकारी जमीन की कथित खरीद-बिक्री का मामला सामने आने के बाद अंचल प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। ग्रामीणों की शिकायत पर अंचल अधिकारी निकिता बाला मंगलवार को अंचल विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और विवादित जमीन का स्थल निरीक्षण किया। इसके बाद जमीन की मापी का काम शुरू कराया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निजी जमीन की खरीद-बिक्री की आड़ में बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि को भी निजी बताकर बेचने का प्रयास किया गया। शिकायत में कहा गया है कि तीन एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को निजी जमीन के रूप में दर्शाकर लेन-देन किए जाने की आशंका है।
ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अंचल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की वास्तविक स्थिति, रिकॉर्ड और सीमांकन से जुड़े तथ्यों की जांच की।
ग्रामीणों के अनुसार, बांगो गांव के कुछ लोगों ने अपनी निजी जमीन जमशेदपुर के एक अधिकारी की चिकित्सक पत्नी को बेची थी। आरोप है कि इसी खरीद-बिक्री प्रक्रिया के दौरान आसपास स्थित सरकारी जमीन को भी निजी जमीन बताकर शामिल करने की कोशिश की गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बांगो गांव के बलराम गोप, ज्ञान गोप, शम्भू गोप, नीलकंठ गोप, आनंद गोप और आंतंगिनी बंगालिन ने अपनी निजी जमीन की बिक्री की। इसी दौरान आसपास की सरकारी भूमि को भी निजी संपत्ति के रूप में दिखाए जाने की शिकायत सामने आई है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने अंचल प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की थी। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए होती है और किसी भी व्यक्ति द्वारा इसे निजी संपत्ति बताकर बेचना या कब्जा करने का प्रयास गलत है।
अंचल अधिकारी निकिता बाला ने टीम के साथ पहुंचकर स्थल निरीक्षण किया। अधिकारियों ने जमीन की मापी कराई और संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि जमीन का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है और किस आधार पर इसका लेन-देन किया गया।
जांच के दौरान राजस्व रिकॉर्ड, खतियान, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। यदि जांच में सरकारी जमीन की अवैध बिक्री या हेरफेर की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन की सुरक्षा जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से सरकारी संपत्ति पर दावा न कर सके।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में सरकारी जमीनों की निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सरकारी भूमि को सुरक्षित किया जाए।
अंचल प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। जमीन की मापी और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री से पहले उसके रिकॉर्ड और स्वामित्व की जांच जरूरी होती है। सरकारी जमीन का निजी उपयोग या हस्तांतरण नियमों के विरुद्ध है।
इस मामले के सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि जांच के बाद जमीन की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
फिलहाल अंचल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थल निरीक्षण और मापी के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और सरकारी जमीन को लेकर क्या स्थिति है।