जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के नारदा गांव की 12 वर्षीय छात्रा अनीता सरदार की मौत के मामले में प्रशासनिक जांच तेज कर दी गई है। छात्रा की अचानक मौत के बाद उठ रहे सवालों के बीच उपायुक्त के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने मंगलवार को गांव पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल की। जांच के दौरान सामने आया कि अनीता की मलेरिया रिपोर्ट निगेटिव आई थी और शुरुआती जांच में उसके वायरल फीवर से पीड़ित होने की बात सामने आई है।
जांच टीम ने अनीता के परिजनों, ग्रामीणों और आसपास के लोगों से बातचीत कर घटना से जुड़ी जानकारी जुटाई। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे समय पर इलाज क्यों नहीं मिल पाया और किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई।
जांच दल में एडीएम लॉ एंड ऑर्डर मुकेश मछुआ, जिला प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य अधिकारी (डीआरसीएचओ) डॉ. रंजीत पांडा और इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (आईडीएसपी) के डॉ. असद शामिल थे। टीम ने गांव पहुंचकर स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड और छात्रा की बीमारी से जुड़ी जानकारी भी एकत्र की।
जांच में सामने आया कि अनीता का 7 जुलाई को ब्रेन मलेरिया का टेस्ट कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसके बावजूद छात्रा की तबीयत लगातार खराब होती गई। परिजनों ने बताया कि अनीता कुछ दिन पहले डुमरिया प्रखंड के रूपकोचा स्थित अपने रिश्तेदार के घर गई थी। वहां से लौटने के बाद उसे बुखार की शिकायत हुई थी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला वायरल फीवर का प्रतीत हो रहा है। हालांकि छात्रा की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी जाएगी।
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई कि बीमारी के दौरान परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग को समय पर इसकी जानकारी नहीं दी थी। अधिकारियों का कहना है कि अगर समय रहते स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी चिकित्सा व्यवस्था से संपर्क किया जाता तो बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकता था।
एडीएम लॉ एंड ऑर्डर मुकेश मछुआ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी स्वास्थ्य जागरूकता की कमी है। कई बार लोग बीमारी की गंभीरता को समझ नहीं पाते और इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों या पारंपरिक तरीकों पर निर्भर हो जाते हैं। इससे मरीज को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो जाती है और स्थिति गंभीर हो सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन अब ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान को और मजबूत करेगा। लोगों को समय पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने, गंभीर लक्षणों को पहचानने और बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लेने के लिए जागरूक किया जाएगा।
अनीता सरदार की मौत के बाद गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। वहीं प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
जांच टीम अब छात्रा के इलाज से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही है। इसमें बीमारी के लक्षण, जांच रिपोर्ट, इलाज की प्रक्रिया और अस्पताल पहुंचने में हुई देरी जैसे बिंदुओं को शामिल किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि अनीता की मौत किन कारणों से हुई।
फिलहाल प्राथमिक जांच में मलेरिया की संभावना से इनकार किया गया है और वायरल फीवर को संभावित कारण माना जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि इस घटना से सबक लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।