Jammu.जम्मू: एनआईए कोर्ट ने हथियार तस्करी की साजिश में शामिल आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराधों के मामलों में किसी भी आरोपी को छूट देना न्यायसंगत नहीं है और इससे कानून की धाराओं की गंभीरता कम हो सकती है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हथियार तस्करी केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में जांच और साक्ष्यों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को अंतरिम राहत देना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया में देरी राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के हित में हानिकारक हो सकती है।
एनआईए की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने हथियार तस्करी की योजना बनाई थी और इस मामले में कई स्थानों से हथियार बरामद किए गए हैं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि आरोपी किसी भी तरह की अस्थायी रिहाई या जमानत पर नहीं छोड़े जाएँ।
कोर्ट ने इस पर विचार करते हुए कहा कि साजिश में शामिल आरोपी यदि राहत पाते हैं तो जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में आरोपी की रिहाई से केवल समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बढ़ता है।
इससे पहले, आरोपी पक्ष ने कोर्ट में जमानत और अंतरिम राहत के लिए आवेदन किया था। उनका तर्क था कि आरोपी को जांच के दौरान कुछ राहत दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कोई भी राहत नहीं दी जा सकती।
एनआईए की ओर से कोर्ट को बताया गया कि हथियार तस्करी का यह मामला केवल स्थानीय स्तर का नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा है। कोर्ट ने इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए निर्णय सुनाया।
कोर्ट के फैसले के बाद एनआईए ने कहा कि जांच पूरी तेजी से जारी रहेगी और सभी आरोपियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे। सुरक्षा बलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी संदिग्धों पर लगातार नजर रखें और हथियार तस्करी के किसी भी प्रयास को रोकने में सहयोग करें।
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