JAMMU.जम्मू: जम्मू-कश्मीर में सुनीता करगोत्रा ने हाल ही में प्रॉसिक्यूशन डिपार्टमेंट के कामकाज की समीक्षा की। उनका यह दौरा विभागीय कार्यप्रणाली, मामलों की तेजी से निपटान प्रक्रिया और न्यायालयों में अभियोजन के मानकों को सुधारने के उद्देश्य से किया गया। बैठक में प्रॉसिक्यूशन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और स्टाफ उपस्थित थे। सुनीता करगोत्रा ने विभाग के विभिन्न मामलों की प्रगति, लंबित अभियोजन, और अभियोजन टीम की दक्षता का विस्तृत रिव्यू किया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि किन प्रक्रियाओं में सुधार की जरूरत है और किस तरह से न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
सुनीता करगोत्रा ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन विभाग की भूमिका कानून व्यवस्था बनाए रखने और न्याय सुनिश्चित करने में अहम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामलों का समय पर निपटान सुनिश्चित करें और अभियोजन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न होने पाए।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि अभियोजन टीम को प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन और डेटा प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता है। सुनीता करगोत्रा ने कहा कि डिजिटल रिकॉर्डिंग, केस मैनेजमेंट सिस्टम और समय-सीमा पर निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल अभियोजन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने सुनीता करगोत्रा को बताया कि वर्तमान में विभाग में कई लंबित मामले हैं, लेकिन नई प्रक्रियाओं और तकनीकी सुधारों के माध्यम से इन्हें शीघ्र निपटाया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नियमित समीक्षा बैठकें और अंतर-विभागीय समन्वय अभियोजन की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रॉसिक्यूशन विभाग का यह रिव्यू केवल प्रशासनिक निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया में सुधार और अपराध निवारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे जनता के विश्वास में वृद्धि होगी और कानून का सही पालन सुनिश्चित होगा।
सुनीता करगोत्रा ने अधिकारियों को इस बात पर भी ध्यान देने का निर्देश दिया कि न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखी जाए और नागरिकों को उनकी समस्याओं और केस की स्थिति की पूरी जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि अभियोजन विभाग के कामकाज का प्रभाव सीधे न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रशासन की कार्यकुशलता से जुड़ा है।