जम्मू और कश्मीर

CSIR-IMII और DST ने बायोटेक पार्क विकास की समीक्षा की

Payal
23 April 2026 3:05 PM IST
CSIR-IMII और DST ने बायोटेक पार्क विकास की समीक्षा की
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JAMMU.जम्मू: जम्मू स्थित सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (CSIR-IIIM) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने संयुक्त रूप से बायोटेक पार्कों की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। इस बैठक का उद्देश्य बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं की स्थिति का आकलन करना और भविष्य की रणनीति तय करना था।
बैठक में वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान बायोटेक पार्कों में चल रही अनुसंधान परियोजनाओं, आधारभूत ढांचे की प्रगति और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि बायोटेक पार्कों का मुख्य उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स तथा शोधकर्ताओं के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके माध्यम से औषधीय पौधों, कृषि जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य क्षेत्र में नए शोध को बढ़ावा मिलेगा।
CSIR-IIIM के प्रतिनिधियों ने बताया कि कई परियोजनाएं सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही हैं और कुछ महत्वपूर्ण शोध परिणाम भी सामने आए हैं, जो भविष्य में व्यावसायिक उपयोग के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सरकार बायोटेक पार्कों के विकास को प्राथमिकता दे रही है, ताकि जम्मू-कश्मीर को जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग और शोध संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बायोटेक पार्क न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्टार्टअप के अवसर भी पैदा करेंगे। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाएगी और समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, तकनीकी संसाधनों और फंडिंग की उपलब्धता को भी सुनिश्चित किया जाएगा।
अंततः, CSIR-IIIM और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा बायोटेक पार्कों की प्रगति की समीक्षा यह दर्शाती है कि जम्मू-कश्मीर में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। यह पहल क्षेत्र को बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में मदद करेगी।
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