जम्मू। रक्षाबंधन के त्योहार पर जम्मू शहर में पतंगबाजी का उत्साह कई लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन गया। प्रतिबंध के बावजूद इस्तेमाल की जा रही गट्टु डोर ने राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया। शहर के अलग-अलग इलाकों में गट्टु डोर की चपेट में आने से कई लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) जम्मू पहुंचाया गया।
घायलों में कई लोगों के गले और चेहरे पर डोर से गहरे कट लगे हैं। वहीं, कुछ लोग पतंग उड़ाते समय डोर से हाथ की उंगलियां कटने के कारण भी अस्पताल पहुंचे।
प्रतिबंध के बावजूद नहीं रुका गट्टु डोर का इस्तेमाल
जम्मू प्रशासन की ओर से गट्टु डोर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन इसके बावजूद रक्षाबंधन के मौके पर शहर के कई हिस्सों में इसका इस्तेमाल जारी रहा।
पतंग उड़ाने के दौरान आसमान में दिखाई न देने वाली तेज धार वाली डोर सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए खतरा बन गई। खासकर बाइक और स्कूटी सवार लोग इसकी चपेट में आए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार के दौरान पतंगबाजी बढ़ जाती है, लेकिन खतरनाक डोर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाना जरूरी है।
कई इलाकों से पहुंचे घायल
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जम्मू में शहर के अलग-अलग हिस्सों से घायल लोग पहुंचे। जानकारी के अनुसार, मलिक मार्केट से तीन, छन्नी हिम्मत से तीन, बख्शी नगर से दो और बीसी रोड फ्लाईओवर से दो लोग गट्टु डोर की चपेट में आने के बाद अस्पताल पहुंचे।
इसके अलावा रिहाड़ी और न्यू प्लाट इलाके से भी कई घायल उपचार के लिए जीएमसी पहुंचे।
अस्पताल में पहुंचे कुछ मरीजों के गले पर गहरे कट लगे थे, जबकि कुछ के चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट आई थी।
बाइक सवारों के लिए बनी सबसे बड़ी परेशानी
गट्टु डोर का सबसे ज्यादा खतरा दोपहिया वाहन चालकों के लिए रहा। सड़क पर चलते समय अचानक सामने आई डोर से कई बाइक सवार घायल हो गए।
कई बार तेज धार वाली डोर गले या चेहरे पर लग जाती है, जिससे गंभीर चोट लग सकती है। त्योहार के दौरान बढ़ती पतंगबाजी के कारण शहर की सड़कों पर यह खतरा और बढ़ गया।
हाथों में चोट लेकर भी पहुंचे लोग
गट्टु डोर से केवल सड़क पर चलने वाले लोग ही नहीं, बल्कि पतंग उड़ाने वाले लोग भी घायल हुए।
कई लोगों की उंगलियां डोर पकड़ते समय कट गईं। तेज धार वाली डोर से हाथों पर गहरे घाव होने के कारण उन्हें भी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ा।
डॉक्टरों के अनुसार, कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ गंभीर घाव वाले मरीजों का इलाज किया गया।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
गट्टु डोर पर प्रतिबंध के बावजूद इसके इस्तेमाल की घटनाओं ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों का कहना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि बाजारों में इसकी बिक्री और उपयोग पर सख्त निगरानी जरूरी है।
त्योहारों के दौरान विशेष अभियान चलाकर ऐसी डोर बेचने और इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन और पुलिस की ओर से समय-समय पर लोगों से अपील की जाती है कि वे खतरनाक डोर का इस्तेमाल न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि पतंगबाजी मनोरंजन का हिस्सा है, लेकिन ऐसी डोर का उपयोग लोगों की जान के लिए खतरा बन सकता है।
सड़क पर चलते समय वाहन चालकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, खासकर उन इलाकों में जहां पतंगबाजी अधिक होती है।
त्योहार की खुशी में सुरक्षा जरूरी
रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर पतंगबाजी का उत्साह लोगों में खुशी लाता है, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी गंभीर हादसों का कारण बन सकती है।
जम्मू में गट्टु डोर से हुई घटनाओं ने एक बार फिर साबित किया है कि प्रतिबंधित और खतरनाक डोर के इस्तेमाल पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।
प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि आने वाले समय में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि त्योहारों की खुशियां किसी परिवार के लिए दुख में न बदलें।