Jammu.जम्मू: जीएएमसी (गवर्नमेंट आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज) अखनूर में हाल ही में “सीमाओं से परे आयुर्वेद” विषय पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का उद्देश्य आयुर्वेदिक चिकित्सा के आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं पर चर्चा करना और छात्रों, चिकित्सकों एवं शोधकर्ताओं को नई जानकारी से अवगत कराना था।
सूत्रों के अनुसार, सेमिनार में आयुर्वेद के इतिहास, विज्ञान, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रमुख वक्ताओं ने आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं जैसे पंचकर्म, हर्बल थेरेपी, और आयुर्वेदिक दवाओं के शोध पर जोर दिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कॉलेज के प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल पारंपरिक चिकित्सा नहीं है, बल्कि इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने छात्रों और चिकित्सकों को अपने ज्ञान को लगातार अपडेट रखने और शोध में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
सेमिनार में विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद के प्रभाव को बढ़ाने के लिए नई तकनीक और शोध को अपनाना अनिवार्य है।
एक प्रमुख वक्ता ने कहा, “आयुर्वेद को सीमाओं से परे ले जाने का मतलब है इसे केवल भारत तक सीमित न रखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य और जीवनशैली में योगदान देना। इसके लिए छात्रों और चिकित्सकों को नवाचार और अनुसंधान पर जोर देना होगा।”
कार्यक्रम के दौरान कई सत्र आयोजित किए गए जिसमें चिकित्सकों ने केस स्टडी, आयुर्वेदिक दवाओं की प्रभावशीलता और आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं में आयुर्वेद की भूमिका पर विचार साझा किए। छात्रों ने भी अपने शोध प्रोजेक्ट और अनुभव साझा किए, जिससे सेमिनार और अधिक संवादात्मक और ज्ञानवर्धक बना।
जीएएमसी अखनूर के अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम न केवल छात्रों को आयुर्वेद के गहन ज्ञान से अवगत कराते हैं, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और नई दिशाओं में शोध करने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित छात्रों और शोधकर्ताओं ने सेमिनार की सराहना की और कहा कि इसने उन्हें आयुर्वेद के आधुनिक उपयोग और वैश्विक स्तर पर इसके महत्व को समझने में मदद की। उन्होंने आयुर्वेद को पारंपरिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने वाले कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता जताई।
विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि कॉलेज में समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित करके आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच संवाद को और मजबूत किया जा सकता है।
अखिरकार, “सीमाओं से परे आयुर्वेद” सेमिनार ने यह संदेश दिया कि आयुर्वेद सिर्फ भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक शोध, नवाचार और वैश्विक स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा सकता है।
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