जम्मू। सितंबर का दूसरा पखवाड़ा शुरू होते ही जम्मू-कश्मीर में मौसम के मिजाज में बदलाव के संकेत दिखाई देने लगे हैं। आसमान में बादलों की आवाजाही बढ़ने के साथ अगले कुछ दिनों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। बारिश होने पर दिन के तापमान में धीरे-धीरे कमी आ सकती है, जिससे गर्मी और उमस का सामना कर रहे लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान केंद्र से जुड़ी जानकारी के अनुसार, 14 से 16 सितंबर के दौरान आसमान आंशिक से सामान्य रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। इस अवधि में कुछ स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। शुरुआती अवधि में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान बताया गया है, जिसके बाद इसमें गिरावट आ सकती है।

मौसम के इस संभावित बदलाव का असर मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में अलग-अलग दिखाई दे सकता है। मैदानी इलाकों में तापमान अधिक रहने के साथ उमस महसूस हो सकती है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में बादल और बारिश के कारण मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रह सकता है।

14 से 16 सितंबर तक बारिश की संभावना

पूर्वानुमान के मुताबिक 14 से 16 सितंबर के बीच विभिन्न स्थानों पर हल्की से बहुत हल्की बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में बादलों की गरज और बिजली चमकने की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि, बारिश का वितरण सभी क्षेत्रों में एक जैसा रहने की संभावना नहीं है। कहीं केवल बादल छाए रह सकते हैं तो कुछ स्थानों पर थोड़े समय के लिए बारिश दर्ज हो सकती है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के 14 सितंबर को जारी आधिकारिक बुलेटिन में अगले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर में छिटपुट हल्की बारिश और गरज-चमक का पूर्वानुमान दिया गया है। इसके बाद दो दिनों में हल्की से मध्यम बारिश का दायरा कुछ बढ़ने की संभावना है। विभाग ने 15 से 17 सितंबर के बीच अलग-अलग हिस्सों में बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की आशंका भी जताई है।  

बारिश और तेज हवा की स्थिति कम अवधि के लिए रहने के बावजूद लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खुले स्थानों, पेड़ों, बिजली के खंभों और ढीले निर्माण के पास खड़े होने से बचना चाहिए। मौसम खराब होने पर पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वालों को भी स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के नवीनतम निर्देशों पर ध्यान देना होगा।

तापमान में धीरे-धीरे गिरावट के संकेत

उपलब्ध कृषि मौसम पूर्वानुमान में सोमवार के बाद तापमान में क्रमिक गिरावट आने की संभावना जताई गई है। 15 और 16 सितंबर को अधिकतम तापमान लगभग 35.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान दिया गया है। न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। बादलों और संभावित बारिश के कारण दिन के तापमान में कमी आएगी, लेकिन वातावरण में नमी बढ़ने से कुछ समय तक उमस बनी रह सकती है।

हालांकि, तापमान के आंकड़े स्थान और पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 15 सितंबर के लिए जम्मू शहर का अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान दिया है। वहीं, 35.2 डिग्री सेल्सियस 14 सितंबर के बुलेटिन में जम्मू संभाग के कठुआ में दर्ज सर्वाधिक अधिकतम तापमान था। इसलिए 35.2 अथवा 37 डिग्री के आंकड़ों को पूरे जम्मू-कश्मीर का समान तापमान मानना सही नहीं होगा।

श्रीनगर और कश्मीर घाटी के अन्य हिस्सों में तापमान जम्मू के मैदानी क्षेत्रों से कम रहने की संभावना है। आधिकारिक स्थानीय पूर्वानुमान में श्रीनगर के लिए सामान्य रूप से बादल छाए रहने तथा हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना जताई गई है।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण मौसम

मौसम में होने वाला बदलाव किसानों और बागवानों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश मिट्टी की नमी बनाए रखने में सहायक हो सकती है। लेकिन गरज-चमक, तेज हवा अथवा अचानक तेज बारिश होने पर खड़ी फसलों और बागवानी उपज को नुकसान पहुंचने की आशंका भी रहती है।

कृषि विशेषज्ञ आमतौर पर किसानों को मौसम पूर्वानुमान देखकर सिंचाई, कीटनाशक छिड़काव और कटाई से जुड़े निर्णय लेने की सलाह देते हैं। बारिश की संभावना के बीच रासायनिक दवाओं का छिड़काव करने पर उनका प्रभाव कम हो सकता है। ऐसे में किसानों को स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से जारी सलाह का पालन करना चाहिए।

कटाई के लिए तैयार फसल और खुले में रखी कृषि उपज को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना जरूरी है। पशुपालकों को भी तेज हवा या बिजली चमकने के दौरान पशुओं को खुले मैदान अथवा पेड़ों के नीचे नहीं बांधना चाहिए।

यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह

बदलते मौसम का असर सड़क और हवाई यातायात पर भी पड़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान सड़कों पर फिसलन बढ़ जाती है। संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन अथवा पत्थर गिरने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। वाहन चालकों को नियंत्रित गति से चलने और मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

मौसम विभाग के अनुसार पूर्वानुमान में स्थानीय स्तर पर बदलाव संभव है। इसलिए लोगों को यात्रा या कृषि गतिविधियों की योजना बनाने से पहले ताजा बुलेटिन देखना चाहिए। फिलहाल 16 सितंबर तक बादलों की आवाजाही, हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। बारिश के बाद तापमान में गिरावट आने से मौसम कुछ सुहावना हो सकता है, लेकिन तेज हवा और बिजली चमकने की स्थिति में सतर्कता जरूरी रहेगी।

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