सभी विभागों में डेटा यूनिट, योजनाओं को मिलेगा फायदा

Update: 2026-07-25 15:08 GMT

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी प्रशासनिक विभागों में डेटा स्ट्रैटेजी यूनिट्स (डीएसयू) के गठन को मंजूरी दे दी है। इस पहल का उद्देश्य विभागों के बीच डेटा के बेहतर आदान-प्रदान, डेटा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने और नीतिगत फैसलों को अधिक सटीक बनाने का है।

सरकार का मानना है कि आधुनिक प्रशासन में डेटा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। सही और व्यवस्थित डेटा के आधार पर योजनाओं की बेहतर निगरानी, संसाधनों का सही उपयोग और नागरिक सेवाओं में सुधार किया जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर में एक मजबूत डेटा गवर्नेंस व्यवस्था विकसित करने की योजना तैयार की गई है।

महाप्रशासनिक विभाग के अनुसार, प्रत्येक प्रशासनिक विभाग में गठित होने वाली डेटा स्ट्रैटेजी यूनिट की अध्यक्षता संबंधित विभाग के प्रशासनिक सचिव करेंगे। योजना इकाई के प्रमुख को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। इसके अलावा लेखा इकाई के प्रमुख, विशेष सचिव या अतिरिक्त सचिव और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ इस यूनिट के सदस्य होंगे।

सरकार ने प्रत्येक विभाग की योजना इकाई के प्रमुख को मुख्य डेटा अधिकारी (सीडीओ) के रूप में नामित किया है। सीडीओ की जिम्मेदारी विभागीय डेटा की गुणवत्ता, सुरक्षा और सही उपयोग को सुनिश्चित करना होगी। वे डेटा गवर्नेंस मानकों का पालन कराने के साथ-साथ विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करेंगे।

इस पूरी व्यवस्था के लिए जम्मू-कश्मीर के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। निदेशालय एक समर्पित डेटा हार्मोनाइजेशन सेल स्थापित करेगा, जो राज्य स्तर पर डेटा कैटलॉग तैयार करने, डेटा मानकों को विकसित करने और विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का काम करेगा।

डेटा स्ट्रैटेजी यूनिट्स विभागों के डेटा स्रोतों की पहचान करेंगी और उन्हें नियमित रूप से अपडेट रखेंगी। इसके अलावा मेटाडेटा तैयार करना, डेटा की गुणवत्ता की जांच करना और विभिन्न विभागों के बीच एपीआई के माध्यम से डेटा साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करना भी इनकी जिम्मेदारी होगी।

सरकार के अनुसार, इस पहल से प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक होगी। विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध जानकारी एक समान मानकों के आधार पर उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। साथ ही सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

इस व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह होगा कि अलग-अलग विभागों में एक ही तरह के डेटा को बार-बार तैयार करने की जरूरत कम होगी। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी। इसके अलावा डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा और सरकार नागरिकों तक सेवाएं अधिक तेजी और प्रभावी तरीके से पहुंचा सकेगी।

हालांकि, इस नई व्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां भी होंगी। बड़ी मात्रा में डेटा साझा किए जाने से साइबर सुरक्षा और गोपनीयता का खतरा बढ़ सकता है। इसके लिए मजबूत सुरक्षा प्रणाली और स्पष्ट नियमों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा सभी विभागों में तकनीकी क्षमता विकसित करना और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी एक चुनौती होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा गवर्नेंस व्यवस्था तभी सफल होगी जब विभाग नियमित रूप से डेटा अपडेट करें और आपसी समन्वय बनाए रखें। गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर लिए गए फैसले योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर सरकार की यह पहल प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो इससे सरकारी योजनाओं की बेहतर निगरानी, पारदर्शिता में वृद्धि और नागरिक सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

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