हेड कांस्टेबल हत्या पर बोले CM उमर, घर गिराना समाधान नहीं

Update: 2026-07-23 09:17 GMT

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य में कानून-व्यवस्था और हालिया सुरक्षा कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह पुलिसकर्मियों के गुस्से और दर्द को समझते हैं, क्योंकि आतंकवादी घटनाओं में जवानों की जान जाने से सुरक्षा बलों में स्वाभाविक आक्रोश होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी कार्रवाई को कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बदले की भावना से की गई कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि घर गिराने या बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां करने से हालात बेहतर नहीं होंगे, बल्कि इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ सकती है। उन्होंने जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लोगों को साथ लेकर चलना बेहद जरूरी है।

उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में हुई आतंकी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों और पुलिस के जवान लगातार कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। हेड कांस्टेबल की हत्या जैसी घटनाएं बेहद दुखद हैं और पूरे समाज में आक्रोश पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि लोगों में भी इस घटना को लेकर गुस्सा है और हर कोई दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में पहलगाम आतंकी हमले का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद कुछ लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए थे और कुछ घरों को गिराने की कार्रवाई भी हुई थी। लेकिन बाद में जांच प्रक्रिया में सामने आया कि हमले में किसी स्थानीय व्यक्ति की भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जांच के किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना और उसके परिवार को सजा देना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी भी अपराध या आतंकी गतिविधि में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन कार्रवाई सबूतों और कानून के आधार पर होनी चाहिए। निर्दोष लोगों को परेशान करने से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होती, बल्कि इससे जनता और प्रशासन के बीच दूरी बढ़ सकती है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए सरकार, सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच विश्वास जरूरी है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल बल प्रयोग से नहीं जीती जा सकती, बल्कि लोगों का सहयोग भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आम लोगों ने हमेशा आतंकवाद का विरोध किया है। पहलगाम हमले के बाद भी स्थानीय लोगों ने अपनी नाराजगी जताई थी और आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि जनता को अलग-थलग करने के बजाय उन्हें साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि पुलिस और जवानों का बलिदान देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन साथ ही उन्होंने अपील की कि हर कार्रवाई संविधान और कानून के अनुसार होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री के इस बयान को संतुलित रुख के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने एक तरफ पुलिस और सुरक्षा बलों की भावनाओं को समझने की बात कही, वहीं दूसरी ओर नागरिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर भी जोर दिया।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति तभी संभव है, जब सरकार और जनता मिलकर काम करें। उन्होंने उम्मीद जताई कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लोगों का विश्वास बनाए रखते हुए प्रदेश को आगे बढ़ाया जा सकता है।

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