श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में इंसान और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। कश्मीर घाटी में भालू, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों के हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो वर्षों में जंगली जानवरों के हमलों की संख्या 15 हजार से ज्यादा पहुंच गई है, जिनमें 32 लोगों की मौत हो चुकी है।

वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब इंसानी बस्तियों के करीब पहुंच रहे जंगली जानवरों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पहाड़ी इलाकों और जंगलों से लगे गांवों में रहने वाले लोग खास तौर पर खतरे का सामना कर रहे हैं।
सुबह के समय सबसे ज्यादा खतरा
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सुबह और शाम के समय जंगली जानवरों की गतिविधियां ज्यादा बढ़ जाती हैं। इसी दौरान लोगों के जंगलों या खेतों की ओर जाने पर हमले का खतरा अधिक रहता है। भालू अक्सर भोजन और पानी की तलाश में जंगलों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। सर्दियों और मौसम में बदलाव के दौरान यह समस्या और बढ़ जाती है।
गांवों में दहशत का माहौल
कश्मीर के कई इलाकों में भालू और तेंदुए के दिखने की घटनाओं के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल है। लोग सुबह जल्दी घर से निकलने और अकेले जंगल की ओर जाने से बच रहे हैं। कई बार जंगली जानवर खेतों, बगीचों और घरों के आसपास पहुंच जाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। वन विभाग की टीमें ऐसे इलाकों में गश्त कर रही हैं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं वन्यजीवों के हमले?
विशेषज्ञों के मुताबिक जंगलों में भोजन और प्राकृतिक आवास की कमी, बढ़ता मानवीय दखल और बदलता पर्यावरण इंसान-वन्यजीव संघर्ष का बड़ा कारण बन रहे हैं। जंगलों के आसपास नई बस्तियां बसने और खेती का विस्तार होने से जंगली जानवरों का संपर्क इंसानों से बढ़ रहा है। इससे टकराव की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
वन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अकेले जंगलों की ओर न जाएं, बच्चों को खुले क्षेत्रों में अकेला न छोड़ें और जंगली जानवर दिखने पर तुरंत विभाग को सूचना दें।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग वन्यजीवों से बचाव के उपायों को समझ सकें।
सुरक्षा के लिए सावधानी जरूरी
कश्मीर में बढ़ते वन्यजीव हमलों को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। जंगलों के पास रहने वाले लोगों को सुबह और शाम के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वन्यजीवों का संरक्षण और इंसानों की सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। इसके लिए प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी माना जा रहा है।
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