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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मनशेरा, कोटली और मुजफ्फराबाद में स्थित करीब 11 आतंकी शिविरों में 500 से 700 आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां मौजूद लांचिंग पैड पर करीब 150 आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं। यह खुलासा श्रीनगर में सेना के एक अधिकारी ने किया। अधिकारी के मुताबिक इन आतंकी शिविरों में आतंकियों को 21 दिन की दौरा ए आम और फिर 3 महीने की दौरा ए खास ट्रेनिंग दी जाती है।

अधिकारी ने कहा कि इस साल अब तक घाटी में नियंत्रण रेखा पर कोई सफल घुसपैठ नहीं हुई है। आतंकवादियों का एक समूह आया था और उसे बांदीपोरा और सोपोर में हुई मुठभेड़ों के दौरान मार दिया गया था। सैन्य अधिकारी के मुताबिक घुसपैठ केवल घाटी के रास्तों से नहीं होती है।
आतंकी अब अन्य मार्गों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वे अब आतंकी राजोरी-पुंछ मार्ग, पीर पंजाल के दक्षिण के इलाकों में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे भी इनपुट हैं कि कुछ आतंकी नेपाल के रास्ते भी दाखिल हुए होंगे। हालांकि सेना ने भी हाल के वर्षों में जिस तरह से फेंसिंग को मजबूत किया है, जिस तरह से तैनाती की गई है और सर्विलांस उपकरण लगाए गए हैं उससे घुसपैठ में कमी आई है।
अधिकारी के मुताबिक आतंक विरोधी ऑपरेशन काफी सफल रहे हैं। पिछले 40-42 दिनों में 50 से अधिक आतंकियों का सफाया किया है। उन्होंने कहा कि जब तक आतंकियों को समर्थन मिलेगा तब तक आतंकवाद रहेगा। लोगों को समझना होगा कि क्या गलत है और क्या सही। एक बार जब लोग उन्हें अस्वीकार कर देंगे तो उनके पास कोई रास्ता नहीं होगा।
एफएटीएफ से पाकिस्तान के बाहर निकलने का सेना पर कोई नकारात्मक प्रभाव दिखाई पड़ेगा... इस सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान अभी पूरी तरह से बाहर नहीं हुआ है क्योंकि जमीन पर चीजों का पता लगाने के लिए अभी तक एक टीम नहीं आई है।
घाटी के हालात को लेकर उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में समग्र सुरक्षा स्थिति बेहतर है और बहुत नियंत्रण में है। आसान लक्ष्य (सॉफ्ट टार्गेट) पर जो हमले हो रहे वो इसलिए हो रहे हैं क्योंकि आतंकवादी दबाव में हैं और उन्हें पीछे धकेला गया है। घाटी में मौजूदा दौर को संवेदनशील बताते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा तंत्र ने कई चीजों को नियंत्रण में कर लिया है।
लक्षित हत्याओं पर कहा कि जब कोई व्यक्ति दबाव में आता है और उसे पीछे धकेल दिया जाता है और जब उसे लगता है कि वह नियंत्रण खो रहा है तो वह ऐसी चीजें करता है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी जानते हैं कि सबसे कमजोर कड़ी कौन सी है। कश्मीरी पंडित समाज में काम कर रहे हैं, समाज में घूम रहे हैं और उन्हें निशाना बनाना आसान है। हालांकि अधिकारी ने कहा कि हर व्यक्ति की सुरक्षा करना या उन्हें चौबीसों घंटे सुरक्षा मुहैया कराना संभव नहीं है।
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