Shimlaशिमला : हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा बुधवार को दलबदलू विधायकों के पेंशन लाभ को रद्द करने वाला विधेयक पारित किए जाने के बाद , राज्य मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि यह विधेयक एक संदेश देने के लिए लाया गया है और इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। "सीएम ने इस पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है; यह सुनिश्चित करने के लिए एक निवारक है कि अतीत में हुई घटनाओं की श्रृंखला हिमाचल प्रदेश में दोहराई न जाए । यह निर्णय लिया गया है कि पार्टी से गद्दारी करने वालों को सुविधाएं नहीं दी जानी चाहिए। यह विधेयक एक संदेश देने के लिए लाया गया है, कोई दुर्भावना नहीं है। इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है, "उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संशोधन को सही ठहराते हुए कहा, "विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराए गए विधायकों को पेंशन और भत्ते से बाहर रखा जाएगा। इससे लोकतंत्र मजबूत होगा। यह उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक होगा जो राजनीतिक लाभ के लिए अपनी पार्टी से गद्दारी करते हैं और निष्ठा बदलते हैं। वे पार्टी बदलने से पहले सौ बार सोचेंगे।"
सीएम सुखू ने आगे कहा कि इससे दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन करने वालों पर लगाम लगेगी। हिमाचल प्रदेश विधानसभा (भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक 2024, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू द्वारा पेश किया गया था। विपक्षी विधायकों की कड़ी आलोचना के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जिन्होंने संशोधन को राजनीति से प्रेरित करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की। इस संशोधन का उन छह कांग्रेस विधायकों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, जिन्हें 28 फरवरी को हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने के लिए अयोग्य ठहराया गया था। अयोग्य विधायकों में सुजानपुर से राजेंद्र राणा, धर्मशाला से सुधीर शर्मा, बड़सर से इंद्रदत्त लखनपाल, लाहौल स्पीति से रवि ठाकुर, कुटलैहड़ से देवेंद्र कुमार भुट्टो और गगरेट से चैतन्य शर्मा शामिल हैं। इस विधेयक का विशेष रूप से देवेंद्र भुट्टो और चैतन्य शर्मा पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, जो पहली बार विधायक बने थे। अन्य चार अयोग्य विधायक पहले भी पद पर रह चुके हैं, और उनमें से दो ने भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) के उम्मीदवार के रूप में उपचुनाव जीतकर अपनी सीटें वापस पा ली हैं। (एएनआई)
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