Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: शिमला जिले के ठियोग में किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण-सुरक्षित खेती के तरीकों के बारे में जागरूक करने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण किसानों को आधुनिक और टिकाऊ कृषि तकनीकों से अवगत कराना है, ताकि वे अपनी उपज बढ़ा सकें और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।
कार्यशाला में कृषि विभाग के विशेषज्ञों और स्थानीय अधिकारियों ने किसानों को जैविक उर्वरकों, सिंचाई तकनीक, फसल चक्र और मिट्टी संरक्षण जैसी तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने किसानों को बताया कि टिकाऊ खेती से उत्पादन में सुधार के साथ-साथ लागत में कमी और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव है।
किसानों ने बताया कि वे परंपरागत खेती के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ उन्हें अपने खेतों में व्यावहारिक बदलाव करने की दिशा में मार्गदर्शन देती हैं।
कृषि विभाग के अधिकारी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि किसानों को टिकाऊ खेती की विधियों के बारे में जानकारी दी जाए, ताकि वे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग समझदारी से कर सकें और पर्यावरण के अनुकूल खेती कर सकें।” उन्होंने यह भी कहा कि विभाग नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा और किसानों की जरूरतों के अनुसार तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
कार्यशाला में किसानों ने मिट्टी परीक्षण, जल संरक्षण तकनीक और फसल विविधता पर भी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने समझा कि कैसे विभिन्न फसलों को बदल-बदलकर लगाने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और कीटों और रोगों से बचाव होता है।
स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि यह कदम न केवल किसानों के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि शिमला जिले की कृषि क्षेत्र की स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों में लागू करें और अनुभव साझा करें।
इस अवसर पर किसानों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे और प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ, जिससे ग्रामीण इलाकों में टिकाऊ और लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिल सके।