शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठा। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने सरकारी विभागों में नौकरियों, प्रशिक्षण और मेडिकल शिक्षा में पिछड़ा वर्ग को दिए जा रहे आरक्षण को लेकर सरकार से जानकारी मांगी।

भाजपा विधायक ने सदन में सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के लिए कितना प्रतिशत आरक्षण लागू कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से एमबीबीएस सीटों और विश्वविद्यालयों में सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

प्रश्नकाल में उठा आरक्षण का मुद्दा

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सुख राम चौधरी ने सरकार से पूछा कि पिछड़ा वर्ग के युवाओं को सरकारी सेवाओं में कितने प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विभिन्न विभागों में भर्ती और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ओबीसी वर्ग की भागीदारी कितनी है।

इसके अलावा उन्होंने मेडिकल शिक्षा में आरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए और पूछा कि एमबीबीएस में पिछड़ा वर्ग के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं।

मेडिकल कॉलेजों में आरक्षित सीटों की जानकारी

विधायक सुख राम चौधरी ने सदन में सरकार की ओर से दिए गए जवाब का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों पर ओबीसी आरक्षण की स्थिति अलग-अलग है।

उन्होंने बताया कि आईजीएमसी (इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला) में एमबीबीएस की कुल 102 सीटों में से 4 सीटें आरक्षित हैं।

वहीं, मेडिकल कॉलेज टांडा में 2 सीटें, नेरचौक मंडी मेडिकल कॉलेज में 101 सीटों में से 2 सीटें, हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में 102 सीटों में से 2 सीटें और चंबा मेडिकल कॉलेज में भी 2 सीटें आरक्षित होने की जानकारी दी गई।

विश्वविद्यालयों में आरक्षण पर भी मांगी जानकारी

भाजपा विधायक ने विश्वविद्यालयों में सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने पूछा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था किस तरह लागू की जा रही है।

उनका कहना था कि आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य पिछड़े वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना है, इसलिए इसके सही क्रियान्वयन की जानकारी जरूरी है।

सरकार के जवाब पर हुई चर्चा

विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए जवाब के बाद इस मुद्दे पर चर्चा हुई। विपक्ष ने आरक्षण के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए और सरकार से व्यवस्था को और स्पष्ट करने की मांग की।

भाजपा विधायक ने कहा कि पिछड़ा वर्ग के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि आरक्षण व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाए और जहां भी जरूरत हो वहां सुधार किए जाएं।

OBC आरक्षण बना राजनीतिक मुद्दा

हिमाचल प्रदेश में पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर समय-समय पर राजनीतिक दल अपनी राय रखते रहे हैं।

विधानसभा में इस मुद्दे के उठने के बाद एक बार फिर आरक्षण व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है।

युवाओं और छात्रों से जुड़ा विषय

आरक्षण का मुद्दा सीधे तौर पर युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों को अवसर मिलते हैं।

ऐसे में विधानसभा में इस विषय पर चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे भी जारी रह सकती है चर्चा

मंगलवार को विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद आने वाले दिनों में भी आरक्षण और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा होने की संभावना है।

विपक्ष सरकार से आंकड़ों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार अपनी नीतियों और नियमों के अनुसार जवाब दे रही है।

हिमाचल विधानसभा में उठा यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

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