शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बेड़े में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था के उद्देश्य से शामिल की गईं नई इलेक्ट्रिक बसें अब एक तकनीकी समस्या से जूझ रही हैं। ई-बसों में हेडलाइट के फोकस से जुड़ी दिक्कत सामने आई है, जिससे रात के समय पहाड़ी और संकरी सड़कों पर वाहन चलाना चालकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।

ई-बस चालकों के अनुसार, रात में पहाड़ी क्षेत्रों में सफर के दौरान हेडलाइट की रोशनी सड़क पर सही तरीके से केंद्रित नहीं हो रही है। रोशनी सड़क के बजाय इधर-उधर फैल रही है, जिससे चालकों को आगे का रास्ता साफ दिखाई नहीं देता। खासतौर पर तीखे मोड़ों और संकरी पहाड़ी सड़कों पर यह समस्या अधिक परेशानी पैदा कर रही है।

चालकों का कहना है कि हिमाचल के कई पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में रात के समय सड़क किनारे पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की सुविधा नहीं होती। ऐसे में वाहन चलाने के लिए हेडलाइट ही चालक के लिए सबसे बड़ा सहारा होती है। यदि हेडलाइट का फोकस सही न हो तो दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

ई-बस चालकों के मुताबिक, पहाड़ी क्षेत्रों में रात का सफर पहले ही चुनौतीपूर्ण होता है। सड़कें संकरी होती हैं, कई जगहों पर तीखे मोड़ होते हैं और सामने से आने वाले वाहनों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हेडलाइट की खराब रोशनी चालक के लिए अतिरिक्त परेशानी बन रही है।

उन्होंने बताया कि हेडलाइट की रोशनी सड़क पर सही दिशा में न पड़ने के कारण स्टीयरिंग संभालने में दिक्कत होती है। चालक को बार-बार अनुमान लगाकर वाहन चलाना पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव भी बढ़ता है।

एचआरटीसी ने हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक बसों को अपने बेड़े में शामिल किया है। इन बसों को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक बसों से प्रदूषण कम करने और यात्रियों को आधुनिक सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, नई तकनीक वाली इन बसों में सामने आई हेडलाइट समस्या ने चालकों की चिंता बढ़ा दी है। चालकों का कहना है कि तकनीकी सुविधाओं के साथ सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

ई-बस चालकों ने मांग की है कि हेडलाइट फोकस की समस्या को जल्द दूर किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते तकनीकी खराबी को ठीक नहीं किया गया तो रात के समय बस संचालन में जोखिम बना रहेगा।

पहाड़ी इलाकों में परिवहन व्यवस्था में चालक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। खराब मौसम, अंधेरा और कठिन सड़क परिस्थितियों के बीच चालक को लगातार सतर्क रहना पड़ता है। ऐसे में वाहन की लाइट व्यवस्था का सही होना जरूरी माना जाता है।

चालकों का कहना है कि बसों में यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। यदि चालक को सड़क साफ दिखाई नहीं देगी तो इसका असर सीधे यात्रियों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

नई इलेक्ट्रिक बसों को लेकर यात्रियों में भी उत्साह रहा है। आधुनिक सुविधाओं और पर्यावरण अनुकूल तकनीक के कारण इन बसों को परिवहन व्यवस्था में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन तकनीकी समस्याओं का समाधान होना भी उतना ही जरूरी है।

ई-बस चालकों के अनुसार, समस्या केवल रोशनी की दिशा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रात के समय ड्राइविंग के दौरान आत्मविश्वास भी प्रभावित हो रहा है। चालक को हर मोड़ पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

हिमाचल में बड़ी संख्या में ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बस सेवाएं संचालित होती हैं। कई रूट ऐसे हैं जहां रात के समय सड़कें पूरी तरह अंधेरे में होती हैं। ऐसे मार्गों पर वाहन की हेडलाइट सबसे अहम सुरक्षा उपकरण होती है।

चालकों ने बताया कि यदि हेडलाइट का फोकस सही तरीके से सेट हो जाए तो समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इसके लिए तकनीकी जांच और जरूरी सुधार की आवश्यकता है।

एचआरटीसी के बेड़े में शामिल इलेक्ट्रिक बसें लंबे समय तक चलने और बेहतर परिवहन सुविधा देने के उद्देश्य से लाई गई हैं। लेकिन इन बसों की तकनीकी खामियों को दूर करना जरूरी है ताकि इनका संचालन सुरक्षित और प्रभावी तरीके से हो सके।

परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नए वाहन को सेवा में शामिल करने के बाद उसके सभी सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी होती है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में चलने वाले वाहनों में ब्रेक, लाइट और अन्य तकनीकी प्रणालियों का सही होना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

चालकों का कहना है कि वे लगातार कठिन परिस्थितियों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में वाहन की तकनीकी समस्याओं का जल्द समाधान होने से उनका काम आसान होगा और यात्रियों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।

फिलहाल ई-बसों में हेडलाइट फोकस की समस्या को लेकर चालकों ने अपनी परेशानी सामने रखी है। अब देखना होगा कि एचआरटीसी की ओर से इस तकनीकी दिक्कत को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

नई इलेक्ट्रिक बसों को लेकर जहां आधुनिक परिवहन की उम्मीदें जुड़ी हैं, वहीं सुरक्षा से जुड़े छोटे-छोटे तकनीकी सुधार भी जरूरी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित सफर के लिए हेडलाइट जैसी बुनियादी सुविधा का सही होना बेहद महत्वपूर्ण है।

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