Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के रामपुर नर्सिंग हॉस्टल में टीबी (तपेदिक) के सिर्फ़ दो मामलों की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि हॉस्टल में यह स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और छात्रों तथा स्टाफ के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों मामलों की समय पर पहचान और उपचार शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि संक्रमित छात्रों को अलग से चिकित्सा और देखभाल प्रदान की जा रही है, जबकि हॉस्टल के अन्य छात्रों और स्टाफ के लिए निगरानी और जांच जारी है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि हॉस्टल के वातावरण को सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। इसमें हवा परिसंचरण, नियमित सैनिटाइजेशन और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान शामिल हैं। विभाग ने छात्रों से अपील की कि वे स्वयं की स्वास्थ्य जाँच और सतर्कता बनाए रखें और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रामपुर नर्सिंग हॉस्टल में टीबी के इतने कम मामलों का मतलब यह है कि अवधि में संक्रमण का खतरा सीमित है। उन्होंने कहा कि समय पर निगरानी और उपचार से टीबी के मामलों को नियंत्रित करना संभव है और बड़े स्तर पर फैलने से रोका जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में विशेष हेल्थ कैंप और जागरूकता अभियान शुरू किया है। छात्रों और उनके अभिभावकों को जानकारी दी जा रही है कि टीबी के लक्षण, परीक्षण और उपचार के बारे में जागरूक रहें। इसके साथ ही विभाग ने सुनिश्चित किया है कि सभी संक्रमित छात्रों को पूरा मेडिकल सपोर्ट मिलेगा।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि रामपुर नर्सिंग हॉस्टल में यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और समय पर कार्रवाई का उदाहरण है। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय से अपील की कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।