शिमला। केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य तय करते हुए 2026 से 2029 के लिए तीन साल का समयबद्ध रोडमैप तैयार किया है। इस रणनीति को चार प्रमुख स्तंभों, 25 घटकों और 200 से अधिक एक्शन पॉइंट में बांटा गया है। इसमें ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई से लेकर सिंथेटिक और केमिकल ड्रग्स, नशे की मांग कम करने, पुनर्वास, फॉरेंसिक क्षमता बढ़ाने और केंद्र-राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय तक कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।इस रोडमैप की जानकारी शिमला में केंद्रीय गृह मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से 'नशा मुक्त भारत अभियान 2029' पर आयोजित मीडिया संवाद के दौरान दी गई। कार्यक्रम में पीआईबी के अतिरिक्त महानिदेशक एवं गृह मंत्रालय के मुख्य मीडिया एवं संचार अधिकारी राज कुमार और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के उत्तर क्षेत्र के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने अभियान की रणनीति के बारे में विस्तार से बताया।
अधिकारियों के मुताबिक अभियान को 'Whole of Government' और 'Whole of Society' की अवधारणा पर आगे बढ़ाया जाएगा। यानी नशे की समस्या से निपटने की जिम्मेदारी केवल पुलिस या नारकोटिक्स एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगी। केंद्र और राज्य सरकारों के साथ सुरक्षा बल, शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थान, युवा संगठन और समाज के दूसरे वर्गों को भी इससे जोड़ा जाएगा।राज कुमार ने बताया कि 2026-29 का विजन डॉक्यूमेंट राज्यों, संबंधित एजेंसियों और केंद्र सरकार के 35 से अधिक मंत्रालयों एवं विभागों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। अलग-अलग मंत्रालयों, राज्यों और एजेंसियों की जिम्मेदारियां तथा समयसीमा निर्धारित की गई है।
अभियान के क्रियान्वयन में **NCORD यानी नार्को कोऑर्डिनेशन मैकेनिज्म** की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके शीर्ष स्तर की एपेक्स कमेटी की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री करते हैं। NCB अभियान में प्रमुख भूमिका निभाएगा, जबकि गृह मंत्रालय, राज्य सरकारें, स्थानीय एवं जिला पुलिस, सुरक्षा बल, विदेश मंत्रालय और अन्य संबंधित एजेंसियां इसमें सहयोग करेंगी।
पहला स्तंभ: ड्रग तस्करों के पूरे नेटवर्क पर निशाना
तीन वर्षीय रोडमैप का पहला स्तंभ खुफिया जानकारी और ऑपरेशन आधारित प्रवर्तन पर केंद्रित है। सरकार की रणनीति केवल किसी स्थान से ड्रग्स की खेप जब्त करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसके पीछे सक्रिय पूरे तस्करी नेटवर्क की पहचान कर उसे खत्म करने पर जोर होगा।NCB के अधिकारी अमनजीत सिंह के मुताबिक रणनीति 'नेटवर्क सेंट्रिक' होगी। ड्रग नेटवर्क की आर्थिक ताकत को कमजोर करने के लिए उससे जुड़ी संपत्तियों की पहचान, जब्ती, फ्रीजिंग और कानूनी प्रक्रिया के तहत कुर्की जैसे कदमों पर भी ध्यान दिया जाएगा।रोडमैप में विदेश से भारत को निशाना बनाकर नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने वाले **100 प्रमुख वांछित आरोपियों को 2029 तक वापस लाने** का लक्ष्य भी रखा गया है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय और अंतर-एजेंसी सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा।
दूसरा स्तंभ: सिंथेटिक और केमिकल ड्रग्स पर शिकंजा
दूसरे स्तंभ में सिंथेटिक और केमिकल ड्रग्स की चुनौती को शामिल किया गया है। इसके तहत अवैध तरीके से सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाली गुप्त प्रयोगशालाओं की पहचान और उन पर कार्रवाई के साथ ही प्रीकर्सर केमिकल्स की निगरानी मजबूत करने की योजना है।प्रीकर्सर ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं जिनका वैध औद्योगिक या औषधीय इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन उनका दुरुपयोग अवैध ड्रग्स बनाने में भी किया जा सकता है।सरकार ने इन पदार्थों की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर अंतिम इस्तेमाल तक **100 प्रतिशत डिजिटल विजिबिलिटी** विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य सप्लाई चेन में उनकी गतिविधियों की बेहतर निगरानी करना और अवैध ड्रग निर्माण की तरफ उनके डायवर्जन को रोकना है।
तीसरा स्तंभ: जागरूकता, उपचार और पुनर्वास
तीसरा स्तंभ ड्रग्स की मांग कम करने, नशे से होने वाले नुकसान को घटाने और जन-जागरूकता पर आधारित है। इसके तहत नशा मुक्ति और पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।सरकार का मानना है कि केवल ड्रग तस्करों पर कार्रवाई से नशे की समस्या खत्म नहीं की जा सकती। नशे की मांग कम करना, लोगों को इसके नुकसान के बारे में जागरूक करना और नशे से प्रभावित लोगों को उपचार एवं पुनर्वास उपलब्ध कराना भी जरूरी है।इसी कारण अभियान में चिकित्सा संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भूमिका भी रखी गई है।
चौथा स्तंभ: एजेंसियों की क्षमता और समन्वय बढ़ेगा
चौथे स्तंभ में क्षमता निर्माण और अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर ध्यान दिया गया है। इसके तहत राज्यों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मजबूत करने, फॉरेंसिक क्षमता बढ़ाने और जांच एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।सरकार ने **मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह संसाधनयुक्त एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF)** सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।रोडमैप की प्रगति की निगरानी के लिए जवाबदेही का तंत्र भी तैयार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार त्रैमासिक समीक्षा और स्कोरकार्ड के जरिए अलग-अलग लक्ष्यों की प्रगति का आकलन किया जाएगा।
30 दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट का लक्ष्य
नारकोटिक्स से जुड़े मामलों की जांच और अभियोजन को तेज करने के लिए फॉरेंसिक व्यवस्था में भी सुधार की योजना बनाई गई है। केंद्र ने फॉरेंसिक रिपोर्ट **30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने** का लक्ष्य रखा है।नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में फॉरेंसिक रिपोर्ट जांच और न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रिपोर्ट जल्दी मिलने से जांच एजेंसियों को मामलों की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।इसके लिए फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने और तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने की बात कही गई है।
एक लाख 'नशा मुक्त मित्र' बनाने की तैयारी
नशा मुक्त भारत अभियान में युवाओं को बड़ी भूमिका देने की योजना है। इसके लिए NCC, NSS और **MY Bharat** जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को अभियान से जोड़ा जाएगा।सरकार ने देशभर में **एक लाख 'नशा मुक्त मित्र'** तैयार करने का लक्ष्य रखा है। ये युवा और स्वयंसेवक स्थानीय स्तर पर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने में भूमिका निभाएंगे।सरकार की कोशिश है कि अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न रखकर सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जाए।
स्कूल-कॉलेजों के आसपास 500 मीटर का सेफ जोन
अभियान में स्कूल और कॉलेज परिसरों को नशा मुक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास **500 मीटर के दायरे को प्रस्तावित सुरक्षित क्षेत्र** के रूप में विकसित करने की योजना भी रोडमैप का हिस्सा है।अधिकारियों के मुताबिक इसका उद्देश्य नशीले पदार्थों को स्कूल और कॉलेज के आसपास पहुंचने से रोकना और विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण देना है।इसके साथ विद्यार्थियों और युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूकता अभियानों में सीधे शामिल करने की तैयारी है। शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए नशीले पदार्थों के स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
ड्रग तस्करी अक्सर एक राज्य तक सीमित नहीं रहती। इसी कारण अंतरराज्यीय मामलों में एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने को रोडमैप में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।NCORD व्यवस्था के जरिए एक से अधिक राज्यों से जुड़े मामलों को उच्च स्तर पर उठाया जा सकेगा। संबंधित राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच चर्चा कर कार्रवाई और समन्वय की रणनीति बनाई जाएगी।हिमाचल प्रदेश भी एक अंतरराज्यीय ड्रग सचिवालय का हिस्सा है, जिसमें पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पड़ोसी उत्तराखंड शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार यह सचिवालय पंचकूला में पहले से काम कर रहा है और सदस्य राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेश के बीच समन्वय मजबूत करने के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है।
जून में जारी हुआ था विजन डॉक्यूमेंट
NCB के अधिकारी अमनजीत सिंह के मुताबिक 'Drug-Free India by 2029' विजन डॉक्यूमेंट को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने **26 जून 2026 को NCORD की 10वीं एपेक्स कमेटी बैठक** में जारी किया था।2026 से 2029 तक के इस दस्तावेज में नारकोटिक्स नियंत्रण की व्यापक रणनीति और अगले तीन वर्षों में अभियान लागू करने का ढांचा दिया गया है।अभियान फिलहाल शुरुआती क्रियान्वयन चरण में है। केंद्र अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक मीडिया संवाद और अन्य माध्यमों से रोडमैप की जानकारी पहुंचा रहा है, ताकि इसमें व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
सरकार ने पेश किए कार्रवाई के आंकड़े
मीडिया संवाद के दौरान पिछले वर्षों में नशीले पदार्थों के खिलाफ हुई कार्रवाई से जुड़े आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए। अधिकारियों के अनुसार 2004-2013 की अवधि की तुलना में बाद की अवधि में जब्त किए गए नशीले पदार्थों की मात्रा में **4.6 गुना**, जब्ती के मूल्य में **4.7 गुना** और नष्ट किए गए नशीले पदार्थों की मात्रा में **14.4 गुना** वृद्धि दर्ज की गई है।इन आंकड़ों को सरकार की ओर से प्रस्तुत तुलनात्मक आंकड़ों के रूप में देखा जाना चाहिए। विभिन्न अवधियों के सटीक तुलनात्मक मूल्यांकन के लिए संबंधित सरकारी डेटासेट और अवधि का पूरा विवरण जरूरी होगा।
प्रवर्तन से लेकर पुनर्वास तक एक साथ काम
नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें केवल ड्रग्स पकड़ने और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को समाधान नहीं माना गया है। रोडमैप में खुफिया जानकारी, वित्तीय जांच, फॉरेंसिक क्षमता, रोकथाम, नशा मुक्ति, पुनर्वास, युवा भागीदारी और अंतरराज्यीय समन्वय को एक ही राष्ट्रीय ढांचे में शामिल किया गया है।अधिकारियों के अनुसार निर्धारित समयसीमा, जिम्मेदारी और नियमित समीक्षा के जरिए 2029 के लक्ष्य की दिशा में प्रगति का आकलन किया जाएगा।
केंद्र की योजना अगले तीन वर्षों में चार प्रमुख स्तंभों, 25 घटकों और 200 से अधिक एक्शन पॉइंट के जरिए नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की है। हालांकि **2029 तक 'नशा मुक्त भारत' सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य है**, और इसे हासिल करने की वास्तविक प्रगति आने वाले वर्षों में रोडमैप के क्रियान्वयन, राज्यों की भागीदारी, प्रवर्तन के परिणामों, उपचार एवं पुनर्वास व्यवस्था और सामाजिक सहयोग पर निर्भर करेगी।
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