हिमाचल प्रदेश

वन विभाग कार्यालय से 700 मीटर दूर खैर के पेड़ों का अवैध कटान, तस्करों की तलाश जारी

Kavita2
19 Sept 2026 3:23 PM IST
वन विभाग कार्यालय से 700 मीटर दूर खैर के पेड़ों का अवैध कटान, तस्करों की तलाश जारी
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के इंदौरा क्षेत्र में कथित अवैध पेड़ कटान का मामला सामने आया है। भदरोआ वन परिक्षेत्र कार्यालय से करीब 700 मीटर की दूरी पर अंदरून डमटाल क्षेत्र में खैर के सात से आठ पेड़ कटे हुए पाए गए हैं। वन विभाग के कार्यालय के इतने नजदीक पेड़ों के काटे जाने से विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पेड़ काटने वाले लोगों की पहचान नहीं हो सकी है और मामले की जांच की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, अंदरून डमटाल क्षेत्र में खैर के पेड़ों को काटे जाने की सूचना मिलने के बाद मामला सामने आया। मौके पर सात से आठ खैर के पेड़ कटे हुए पाए गए। वन विभाग के अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पेड़ कब काटे गए, इसमें कितने लोग शामिल थे और काटी गई लकड़ी को कहां ले जाया गया।

वन कार्यालय के नजदीक हुई घटना

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल घटनास्थल की वन परिक्षेत्र कार्यालय से दूरी को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर खैर के पेड़ काटे गए, वह भदरोआ वन परिक्षेत्र कार्यालय से करीब 700 मीटर दूर है। इतनी कम दूरी पर अवैध कटान की घटना सामने आने के कारण स्थानीय स्तर पर वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हालांकि, जांच पूरी होने से पहले यह स्पष्ट नहीं है कि पेड़ों की कटाई किस समय हुई और आरोपियों ने इसके लिए कौन सा तरीका अपनाया। इसलिए केवल घटनास्थल की दूरी के आधार पर किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत अथवा लापरवाही का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

पहले भी सामने आए खैर कटान के मामले

इंदौरा क्षेत्र में खैर की लकड़ी से जुड़े मामले इससे पहले भी सामने आते रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग स्थानों पर कथित अवैध कटान और खैर की लकड़ी के परिवहन से जुड़े मामलों ने वन विभाग की चुनौती बढ़ाई है।

इंदपुर क्षेत्र में पहले कथित तौर पर अवैध रूप से काटे गए खैर के करीब 40 मोच्छे बरामद किए गए थे। इसके अलावा भदरोआ और टूटा तालाब क्षेत्र में खैर की लकड़ी से भरे वाहनों को पकड़े जाने की घटनाएं भी सामने आई थीं। अलग-अलग स्थानों पर पेड़ों के अवैध कटान के मामले दर्ज होने के बाद वन विभाग की ओर से निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

बार-बार सामने आ रही घटनाओं से चिंता

खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ी के परिवहन के लगातार सामने आते मामलों ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं से यह सवाल उठ रहा है कि क्या क्षेत्र में अवैध रूप से लकड़ी काटने और उसे दूसरी जगह पहुंचाने वाले लोग सक्रिय हैं।

हालांकि, इन अलग-अलग घटनाओं को किसी एक संगठित तस्करी नेटवर्क से जोड़ने के लिए जांच और ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। अभी उपलब्ध जानकारी से यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि सभी घटनाओं के पीछे एक ही समूह या नेटवर्क काम कर रहा है।

वन विभाग के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि अंदरून डमटाल में हुई ताजा घटना का पहले पकड़े गए मामलों से कोई संबंध है या नहीं।

खैर की लकड़ी पर रहती है तस्करों की नजर

खैर का पेड़ व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी लकड़ी का इस्तेमाल कत्था तैयार करने सहित विभिन्न कार्यों में किया जाता है। इसी कारण कई क्षेत्रों में खैर के पेड़ों के अवैध कटान और लकड़ी की तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं।

अवैध कटान से केवल सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं होता, बल्कि जंगल और स्थानीय पर्यावरण पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होने पर वन क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई और लकड़ी के परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी होता है। बिना अनुमति पेड़ काटने या वन उपज के अवैध परिवहन के मामलों में वन कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

आरोपियों तक पहुंचना बड़ी चुनौती

अंदरून डमटाल में सामने आए मामले में फिलहाल पेड़ काटने वाले लोग वन विभाग की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी पहचान कर उन्हें पकड़ना है।

जांच में आसपास के इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों, लकड़ी के परिवहन और संभावित वाहनों के संबंध में जानकारी जुटाई जा सकती है। इसके अलावा स्थानीय लोगों से पूछताछ और पहले सामने आए मामलों के रिकॉर्ड की जांच भी आरोपियों तक पहुंचने में मदद कर सकती है।

यदि आसपास CCTV कैमरे मौजूद हैं तो उनकी फुटेज भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, CCTV उपलब्ध होने या जांच में लिए जाने की फिलहाल कोई पुष्टि नहीं है।

गश्त और निगरानी बढ़ाने की जरूरत

लगातार सामने आ रहे कथित अवैध कटान के मामलों के बाद वन क्षेत्र में नियमित गश्त और निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है। खासकर उन रास्तों पर नजर रखने की जरूरत है, जिनका इस्तेमाल जंगल से लकड़ी बाहर ले जाने के लिए किया जा सकता है।

रात के समय निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर वन कर्मचारियों की तैनाती और संदिग्ध वाहनों की जांच जैसी व्यवस्थाएं अवैध कटान को रोकने में उपयोगी हो सकती हैं। साथ ही स्थानीय लोगों से मिलने वाली सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है।

भदरोआ वन परिक्षेत्र कार्यालय के करीब सामने आई ताजा घटना ने एक बार फिर खैर के पेड़ों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है। सात से आठ पेड़ों के कथित अवैध कटान के बाद अब विभाग की जांच पर नजर रहेगी। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों को किस उद्देश्य से काटा गया और इस घटना में कितने लोग शामिल थे।

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