Shimla शिमला : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ मुहिम के दौरान घायल हुए एक रेहड़ी धारक की आइजीएमसी (इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज) में उपचार के दौरान बुधवार को मौत हो गई। घटना के बाद शहरभर में रेहड़ी-फड़ी यूनियन ने हड़ताल कर दी। यूनियन ने मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।
यूनियन के नेताओं ने बताया कि 31 मई को आइजीएमसी के पास नगर निगम की गाड़ी देखकर रेहड़ी धारक घबरा गया और अपना सामान लेकर भागने लगा। इसी दौरान वह गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत उपचार के लिए आइजीएमसी में भर्ती करवाया गया था। हालांकि बुधवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए शिमला पुलिस ने नगर निगम के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारीयों ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शहरभर में हुई हड़ताल के दौरान रेहड़ी-फड़ी वालों ने अपने स्टॉल बंद रखे और अपने कार्यों को स्थगित कर दिया। यूनियन नेताओं ने नगर निगम पर आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए, जिससे यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई।
यूनियन का कहना है कि नगर निगम की कार्रवाई में रेहड़ी वालों को कोई चेतावनी नहीं दी गई और उन्हें अपने सामान की सुरक्षा के लिए समय नहीं दिया गया। इसके कारण कई लोग डर के मारे भागते समय गिर गए और घायल हुए। इस घटना ने शहर में व्यवसायिक गतिविधियों को प्रभावित किया और आम जनता में भी चिंता पैदा कर दी।
आइजीएमसी के डॉक्टरों ने बताया कि घायल रेहड़ी धारक को गंभीर चोटें आई थीं और उसके शरीर की हालत लगातार बिगड़ रही थी। इलाज के दौरान उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट और इमरजेंसी मेडीकल सुविधाएं प्रदान की गईं, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।
इस घटना के बाद नगर निगम और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों और रेहड़ी-फड़ी यूनियन के लोग मांग कर रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की कार्रवाई में सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए और किसी भी नागरिक को बिना चेतावनी या सुरक्षा के खतरे में न डाला जाए।
शिमला पुलिस ने बताया कि मामले में अभी प्रारंभिक जाँच चल रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यूनियन का कहना है कि केवल मुआवजा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों को भी सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
यह घटना नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ मुहिम की कार्यप्रणाली और शहर में रेहड़ी व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा विवाद बन गई है। नगर निगम प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के बीच भी इस मामले को लेकर बैठकें होने की संभावना है।