शिमला: हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को भी राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के मुद्दे पर चर्चा जारी रही। इस दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी बंद किए जाने से प्रदेश को होने वाले आर्थिक नुकसान का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया और विपक्ष भाजपा से स्पष्ट रुख बताने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्यों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है और विपक्ष को प्रदेश हित में इसकी बहाली के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह करना चाहिए।
अग्निहोत्री ने कहा कि पहले जीएसटी मुआवजा भी बंद कर दिया गया, जिससे हिमाचल को बड़ा नुकसान हुआ क्योंकि प्रदेश में बड़ा बाजार नहीं है और राजस्व के सीमित स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि किसी तरह राज्य ने जीएसटी का नुकसान सहन कर लिया, लेकिन अब आरडीजी बंद होने से हर साल लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल और नागालैंड जैसे राज्यों की लगभग 17 प्रतिशत निर्भरता आरडीजी पर रही है, इसलिए इसे बंद करना छोटे राज्यों के लिए बड़ा झटका है।
उपमुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसे केवल नीतिगत फैसला बताना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 68 विधायकों को मिलकर आरडीजी की बहाली के पक्ष में खड़ा होना चाहिए क्योंकि यह किसी सरकार का नहीं बल्कि हिमाचल के स्वाभिमान और भविष्य का सवाल है।
उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश को लगभग 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी मिला और अन्य सहायता मिलाकर करीब 70 हजार करोड़ रुपये केंद्र से प्राप्त हुए, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों के एरियर का भुगतान नहीं किया गया और राज्य पर लगभग 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ दिया गया। वर्तमान सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है और 3–4 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त आय भी अर्जित की गई है, साथ ही खर्चों में कटौती की जा रही है।
अग्निहोत्री ने कहा कि राज्य की कुल आय लगभग 18 हजार करोड़ रुपये है, जबकि स्थायी देनदारियां 35 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 42 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे में आरडीजी बंद होने से वित्तीय दबाव और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार को यह योजना बंद करनी थी तो राज्यों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हिमाचल के हित में प्रधानमंत्री से आरडीजी की बहाली की मांग की जाए। उन्होंने कहा कि यह सरकारों का नहीं, हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व और विकास का प्रश्न है, इसलिए सदन को मिलकर इस लड़ाई को आगे बढ़ाना चाहिए।